दिल्ली : न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया है कि वह आर्थिक नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप न करे : प्रधान न्यायाधीश - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 8 नवंबर 2025

दिल्ली : न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया है कि वह आर्थिक नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप न करे : प्रधान न्यायाधीश

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नई दिल्ली (रजनीश के झा)। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका कानून के शासन की एक मजबूत संरक्षक रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शीर्ष अदालत ने यह सुनिश्चित किया है कि वह आर्थिक नीतिगत मामलों में तब तक हस्तक्षेप नहीं करेगी, जब तक कि मौलिक अधिकारों या संविधान के अन्य प्रावधानों का उल्लंघन नहीं हो रहा हो। वाणिज्यिक न्यायालयों के स्थायी अंतरराष्ट्रीय फोरम की छठी पूर्ण बैठक में उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक और कॉर्पोरेट मामलों में उच्चतम न्यायालय पारदर्शिता और अखंडता सुनिश्चित करने में सतर्क रहा है तथा धोखाधड़ी से लाभ के लिए कानूनी या कॉर्पोरेट संरचनाओं का दुरुपयोग करने के प्रयासों को खारिज करता रहा है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया है कि वह उन नीतिगत मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा, जिनमें आर्थिक पहलू शामिल हैं, जब तक कि मौलिक अधिकारों या संविधान के अन्य प्रावधानों का उल्लंघन न हो।’’


न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘इसी प्रकार, न्यायालय ने पुनः पुष्टि की है कि वाणिज्यिक कानून की कोई भी व्याख्या निष्पक्षता और जनहित को बनाए रखते हुए विधायी मंशा के अनुरूप होनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने आर्थिक स्वतंत्रता, नियामक अनुशासन और निष्पक्षता के बीच संतुलन को लगातार कायम रखा है। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार की शक्तियां-विशेष रूप से कराधान और विनियमन से जुड़े मामलों में-एक स्पष्ट वैधानिक आधार पर टिकी होनी चाहिए और संविधान की सीमाओं के भीतर ही इस्तेमाल की जानी चाहिए।’’ न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘न्यायालय ने यह जोर देकर कहा है कि नियामक संस्थाओं को जहां एक ओर वित्तीय स्थिरता और जनविश्वास बनाए रखना चाहिए, वहीं उनकी नीतियां हमेशा संतुलित और तर्कसंगत होनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक और कॉर्पोरेट मामलों में, न्यायालय पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करने में सतर्क रहा है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि कॉर्पोरेट प्रशासन, दिवालियापन, मध्यस्थता और पर्यावरण जवाबदेही जैसे विविध क्षेत्रों में न्यायालय का दृष्टिकोण हस्तक्षेप करने के बजाय सिद्धांतवादी रहा है। न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि जैसे-जैसे भारत डिजिटल और हरित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, वाणिज्यिक कानून को स्थिरता और नैतिक उद्यम को बढ़ावा देना चाहिए।

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