वाराणसी : 152 संविदाकर्मियों की छंटनी पर बनारस में गरजे बिजलीकर्मी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 13 नवंबर 2025

वाराणसी : 152 संविदाकर्मियों की छंटनी पर बनारस में गरजे बिजलीकर्मी

  • बिजली व्यवस्था चौपट कर निजीकरण की राह बनाई जा रही है : संघर्ष समिति  

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वाराणसी (सुरेश गांधी). बिजली के निजीकरण के खिलाफ बनारस के बिजलीकर्मियों का आंदोलन गुरुवार को 351वें दिन भी जारी रहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आयोजित प्रदर्शन में बिजलीकर्मियों ने एक बार फिर ऊर्जा प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए और चेतावनी दी कि अगर संविदाकर्मियों की छटनी नहीं रोकी गई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान संघर्ष समिति ने बताया कि नगरीय विद्युत वितरण मण्डल-द्वितीय वाराणसी में आगामी 1 दिसंबर से लागू होने वाले नए टेंडर में 641 संविदाकर्मियों में से 152 को बाहर करने की योजना है। समिति का कहना है कि इससे न केवल कर्मचारियों का भविष्य संकट में पड़ेगा बल्कि शहर की बिजली व्यवस्था भी चरमरा जाएगी।


नई टेंडर व्यवस्था से छंटनी का खतरा

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि समिति का प्रतिनिधिमंडल हाल ही में पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक से मिला था, जिन्होंने वर्ष 2023 में निकाले गए संविदाकर्मियों को रिक्त पदों पर अनुभव के आधार पर रखने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद अब नए टेंडर में कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है। इस सूचना के बाद मछोदरी, कज्जाकपुरा, इमिलियाघाट और पहड़िया क्षेत्रों में काम कर रहे कर्मियों में गहरा आक्रोश है। कई कर्मियों ने कहा कि “हमने पूरी उम्र इस विभाग को दी, अब इस उम्र में दूसरी नौकरी मिलना नामुमकिन है। परिवार का गुजारा कैसे चलेगा?”


संघर्ष समिति का आरोप — “निजीकरण की राह तैयार कर रहा प्रबंधन”

वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की छंटनी दरअसल बिजली व्यवस्था को कमजोर कर निजीकरण की पृष्ठभूमि तैयार करने की साजिश है। समिति ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष मण्डल प्रथम में 150 संविदाकर्मियों की छंटनी के बाद गर्मी के दिनों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। ऊर्जा मंत्री ने तब स्वयं कहा था कि “संविदाकर्मियों को निकालकर मुझे बदनाम करने की साजिश चल रही है” और कर्मचारियों की बहाली के निर्देश दिए थे। समिति का कहना है कि यदि वाराणसी मण्डल-द्वितीय में भी यही गलती दोहराई गई तो मछोदरी, मैदागिन, टाउनहॉल, कोनिया, जैतपुरा, सारनाथ, शिवपुर और भोजूबीर समेत कई क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।


 1.18 लाख बिजलीकर्मी संभाल रहे हैं 30 करोड़ उपभोक्ता  

संघर्ष समिति ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में मात्र 1.18 लाख बिजलीकर्मी ही 30 करोड़ से अधिक आबादी को बिजली आपूर्ति और राजस्व वसूली की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें निजीकरण का तोहफा दिया जा रहा है। नेताओं ने कहा कि कर्मचारी आज 12-12 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं, फिर भी प्रबंधन उनकी सेवा समाप्त करने पर तुला है। समिति ने चेताया कि यदि बिजली व्यवस्था चरमराती है, तो इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह ऊर्जा प्रबंधन की होगी।


रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल

संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि “रिस्ट्रक्चरिंग” के नाम पर राजधानी लखनऊ और मेरठ में भी कई पद समाप्त किए गए, जिससे वहां की बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई। उन्होंने बताया कि मेरठ में लागू यह प्रयोग पूरी तरह असफल रहा है, जिस पर विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने भी पावर कॉरपोरेशन को फटकार लगाई थी। शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि यदि प्रबंधन अनुभवहीन गैर-तकनीकी लोगों के भरोसे बिजली व्यवस्था चलाने की कोशिश करेगा, तो इसके दुष्परिणामों की जिम्मेदारी स्वयं लेनी होगी।


प्रबंधन को दोषारोपण की नीति छोड़नी होगी

कर्मचारियों ने कहा कि बार-बार फील्ड में काम कर रहे इंजीनियरों और संविदाकर्मियों पर दोष मढ़ना बंद होना चाहिए। “ऊर्जा विभाग में निर्णय ऊपर से लिए जाते हैं, जबकि संकट का सामना मैदान में काम कर रहे कर्मियों को करना पड़ता है,” संघर्ष समिति के नेताओं ने कहा। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि यदि छंटनी पर रोक नहीं लगी, तो बनारस से लेकर लखनऊ तक हजारों बिजलीकर्मी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। सभा को ई.एस.के. सिंह, अंकुर पाण्डेय, जसवंत कुमार, प्रवीण सिंह, बृज सोनकर, पंकज कुमार, बृजेश कुमार, धर्मेन्द्र यादव, एस.के. सरोज, रंजीत पटेल, धनपाल सिंह, योगेंद्र कुमार, चंद्रशेखर कुमार और सन्नी कुमार समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया। 

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