कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ रोहिताश्व कुमार शर्मा द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात प्राचार्य डॉ. रोहिताश्व कुमार शर्मा द्वारा स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया गया जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी प्रतिस्पर्धा में जीतने से अधिक महत्वपूर्ण होता है भाग लेना तथा अनुभव प्राप्त करना जिससे स्वयं के व्यक्तित्व का विकास हो। शासकीय कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. मंजरी अग्निहोत्री ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रम विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, निष्ठा और समर्पण की भावना का विकास करते हैं। डॉ. कलिका डोलस ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कला तथा साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि इसके अभाव में जीवन संवेदना-शून्य पशु के समान है।
सर्वप्रथम 'कृत्रिम बुद्धिमता मानव जाति के लिए वरदान' विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विषय के पक्ष और विपक्ष पहलुओं पर विद्यार्थियों ने तर्क, उदाहरण और प्रभावी भाषा के माध्यम से विचार प्रस्तुत किए। तदोपरांत 'वर्तमान परिदृश्य में भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता' विषय पर आयोजित वक्तृता प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने आत्मविश्वास से अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अंतिम कड़ी में प्रश्न-मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ सहभागिता कर अपने ज्ञान और तत्परता का प्रदर्शन किया। निर्णायक के रूप में डॉ प्रिया सीथा, सुमन भदौरिया तथा दीपक बिसौरिया उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. देवेंद्र वरवड़े द्वारा किया गया। अंत में डॉ विनयमणि त्रिपाठी ने उपस्थित सभी अतिथियों, निर्णायकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ शीलचंद गुप्ता, डॉ सुशीला पटेल ,डॉ तृप्ता झा, डॉ वैशाली राठौर, डॉ हुमा अख्तर, डॉ मॉली थॉमस, तथा बड़ी संख्या में स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें