नई दिल्ली (रजनीश के झा)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने शुक्रवार को दावा किया कि विधेयकों को मंजूरी देने की समय सीमा को लेकर राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए संदर्भ पर उच्चतम न्यायालय का फैसला राज्यपालों को जवाबदेही के बिना विधायी और नीतिगत निर्णयों को रोकने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य विधानसभाओं में पारित विधेयकों को मंजूरी देने के संबंध में राज्यपाल एवं राष्ट्रपति के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की जा सकती। शीर्ष अदालत ने अपने बहुप्रतीक्षित फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय भी विधेयकों को मंजूरी प्रदान नहीं कर सकता। भाकपा ने एक बयान में कहा, ‘‘भाकपा राज्य विधानसभाओं द्वारा विधिवत पारित विधेयकों को मंजूरी देने के राज्यपालों की शक्ति पर राष्ट्रपति के संदर्भ को लेकर उच्चतम न्यायालय की प्रतिक्रिया पर निराशा व्यक्त करती है।" इसमें कहा गया है कि यह न्यायालय के अप्रैल के उस फैसले को कमजोर कर सकता है, जिसमें तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा लंबे समय तक सहमति को रोकने और विधेयकों को राष्ट्रपति के पास भेजने पर गंभीर आपत्ति जताई गई थी। वाम दल ने कहा, ‘‘यह बदलाव एक महत्वपूर्ण न्यायिक सुरक्षा को कमजोर करता है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोगों की इच्छा और अधिकार किसी विलंब या निष्क्रियता से बाधित नहीं होते हैं।’’
शुक्रवार, 21 नवंबर 2025
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दिल्ली : न्यायालय का फैसला राज्यपालों को नीतिगत निर्णय रोकने के लिए प्रोत्साहित करने वाला : भाकपा
दिल्ली : न्यायालय का फैसला राज्यपालों को नीतिगत निर्णय रोकने के लिए प्रोत्साहित करने वाला : भाकपा
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