वाराणसी : मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नमो घाट से हाइड्रोजन जलयान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 14 दिसंबर 2025

वाराणसी : मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नमो घाट से हाइड्रोजन जलयान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

  • भारत का पहला हाइड्रोजन जलयान गंगा पर दौड़ा

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वाराणसी (सुरेश गांधी). वाराणसी की पवित्र गंगा गुरुवार को एक ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनी, जब देश का पहला पूर्णतः स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन चालित कैटामरान जलयान वाणिज्यिक सेवा में शामिल हुआ। पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नमो घाट से इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। गंगा पर यात्रा के दौरान जलयान की शांति, धुआं-रहित संचालन और आधुनिक तकनीक ने इसे भारत के हरित समुद्री अभियान का प्रतीक बना दिया। इस उपलब्धि के साथ वाराणसी दुनिया के उन बेहद चुनिंदा शहरों में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन-संचालित यात्री जलसेवा शुरू हो चुकी है। 24 मीटर लंबे इस कैटामरान जलयान को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने तैयार किया है। इसे चलाने वाली लो-टेम्परेचर प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल प्रणाली संग्रहित हाइड्रोजन को बिजली में बदलती है और उप-उत्पाद के रूप में केवल शुद्ध पानी उत्सर्जित करती है। 50 यात्रियों की क्षमता, वातानुकूलित केबिन, 7 से 9 नॉट की रफ्तार, और एक बार चार्ज पर 8 घंटे की क्षमता, इसे भविष्य की शहरी जल परिवहन व्यवस्था का मॉडल बनाती है। यह तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और भारत के समुद्री ढांचे में हरित बदलाव की दिशा में एक मील का पत्थर मानी जा रही है।


स्वच्छ और आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता निर्णायक कदम : सोनोवाल

जलयान को रवाना करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, पीएम मोदी के विजन के तहत यह जलयान भारत की हरित और टिकाऊ परिवहन प्रणालियों की दिशा में परिवर्तनकारी पहल है। यह सिर्फ जलयान नहीं, देश के हरित भविष्य का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह पहल, मेक इन इंडिया को नई गति देगी. गंगा की स्वच्छता और संरक्षण को मजबूत करेगी. जलमार्गों पर हरित तकनीक को गति देगी. और अंतर्देशीय जल परिवहन में नेट-जीरो लक्ष्य 2070 की दिशा में इसे बड़ा कदम बताया।


आईडब्ल्यूएआई सीएसएल आईसीएसएल के बीच त्रिपक्षीय समझौते से बढ़ी सुरक्षा और विश्वसनीयता

पायलट जलयान एफसीवी - पायलट 01 की सुरक्षित तैनाती के लिए, आईडब्ल्यूएआई, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड, और इनलैंड एंड कोस्टल शिपिंग लिमिटेड के बीच समझौता हुआ है। यह समझौता तय करता है, तकनीकी समर्थन, संचालन, सुरक्षा प्रोटोकॉल, आवधिक निरीक्षण, निगरानी तंत्र. इससे सुनिश्चित हुआ कि हाइड्रोजन जैसी उन्नत तकनीक सुरक्षित, विश्वसनीय और भारतीय जलमार्ग परिस्थितियों के अनुकूल तरीक़े से तैनात हो।


गंगा की गोद में पर्यावरण-अनुकूल परिवहन का नया युग

वाराणसी में शहरी जल परिवहन के लिए शुरू हुए इस जलयान से शोर-मुक्त यात्रा, धुआं-रहित संचालन, तेज आवागमन, सड़क यातायात पर बोझ में कमी, स्थानीय पर्यटन और रोजगार में वृद्धि जैसे लाभ मिलने की उम्मीद है। ललिता घाट तक गंगा की पहली यात्रा में इसमें मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों का दल सवार हुआ, जिसने इसके संचालन और तकनीकी दक्षता को देखा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री सोनोवाल के साथ, उप्र राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्रा ‘दयालु’, विधायक अवधेश सिंह और केंद्र-राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। आईडब्ल्यूएआई चेयरमैन सुनील पालीवाल, सचिव विजय कुमार, तथा कोचीन शिपयार्ड के विशेषज्ञों ने तकनीकी प्रस्तुति दी।


मेरीटाइम इंडिया विज़न 2030 और अमृतकाल, विज़न 2047 को मिली नई ऊर्जा

हाइड्रोजन जलयान की यह वाणिज्यिक सेवा, मेरीटाइम इंडिया विज़न (एमआईवी) 2030 मेरीटाइम अमृतकाल विज़न (एमएकेवी) 2047 में तय की गई हरित प्रौद्योगिकी आधारित समुद्री विकास योजनाओं को मजबूत करती है। यह जलयान भविष्य में भारत के अंतर्देशीय जल परिवहन नदी-आधारित पर्यटन स्वच्छ ऊर्जा संचालित समुद्री ढांचे के विकास का प्रमुख आधार बनेगा।


वाराणसी बनेगा विश्व का ‘ग्रीन रिवर ट्रांसपोर्ट मॉडल’

गंगा के तट पर हाइड्रोजन आधारित यात्री सेवा शुरू होने से वाराणसी, ग्रीन रिवर ट्रांसपोर्ट सिस्टम का वैश्विक उदाहरण बनने की राह पर है। विशेषज्ञ मानते हैं कि निकट भविष्य में हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन, मल्टी-फ्यूल हाइब्रिड जलयान, और उन्नत ‘साइलेंट मरीन ट्रांसपोर्ट’ के नए मॉडल यहां विकसित किए जा सकते हैं।


भारत का हाइड्रोजन मिशन : ऊर्जा और पर्यावरण दोनों को लाभ

चूंकि हाइड्रोजन जलयान, कार्बन डाई आक्साइड, नाईट्रोजन आक्साइड सल्फर आक्साइड जैसे उत्सर्जन शून्य स्तर पर लाता है और उत्पाद के रूप में केवल जल छोड़ता है, इसलिए यह नदियों की स्वच्छता और जल-पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम है। भारत के ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (₹19,744 करोड़) को भी इससे गति मिलेगी।


वाराणसी ने दिखाई वह राह जिसे दुनिया अपनाएगी

आज गंगा में जब यह जलयान आगे बढ़ा, तो वह सिर्फ एक नाव नहीं थी, वह भारत की तकनीकी क्षमता, पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता और भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था का प्रतीक बन चुकी थी। वाराणसी ने फिर एक बार साबित किया कि परंपरा और तकनीक का संगम ही भारत की असली ताक़त है।

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