- संतोष यादव की 94 रनों की तूफानी पारी, फाइनल में हृदय प्रकाश एकादश को तीन विकेट से हराया
लेकिन असली कहानी तो रनचेज़ में लिखी जानी थी। लक्ष्य बड़ा था, दबाव उससे भी बड़ा। ऐसे में क्रीज़ पर उतरे संतोष यादव—और फिर जो हुआ, वह क्रिकेट प्रेमियों के लिए कविता बन गया। 50 गेंदों पर 13 चौकों और एक गगनचुंबी छक्के से सजे 94 रन, कवर-प्वाइंट के बीच नफ़ासत, मिड विकेट पर ताक़त और फाइन लेग पर टाइमिंग का अद्भुत संगम। मिड विकेट में जड़ा गया उनका छक्का देर तक दर्शकों की स्मृति में गूंजता रहेगा। और जब जीत के लिए आख़िरी गेंद पर चार रन चाहिए थे, तब संतोष ने कवर की दिशा में गेंद को भेजकर पराड़कर एकादश को चैंपियन बना दिया। प्रशांत मोहन के अहम 31 रन भी इस जीत की मजबूत कड़ी बने। हृदय प्रकाश एकादश की ओर से पुरुषोत्तम ने तीन विकेट लिए, जबकि इरफान और सोनू को एक-एक सफलता मिली। पुरुषोत्तम चतुर्वेदी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़, प्रशांत मोहन सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ और सोनू सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए। मैच के बाद नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल (मुख्य अतिथि) और प्रमुख उद्योगपति मयंक अग्रवाल (विशिष्ट अतिथि) ने विजेता-उपविजेता टीमों को ट्रॉफी व व्यक्तिगत पुरस्कार प्रदान किए। समारोह में वाराणसी प्रेस क्लब और काशी पत्रकार संघ के पदाधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और खिलाड़ियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह फाइनल सिर्फ एक जीत नहीं था—यह क्रिकेट की उस आत्मा का उत्सव था, जहां आख़िरी गेंद तक उम्मीद ज़िंदा रहती है और एक शॉट इतिहास बन जाता है।

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