वाराणसी : अंतिम गेंद पर लिखा गया इतिहास, पराड़कर एकादश चैंपियन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 31 दिसंबर 2025

वाराणसी : अंतिम गेंद पर लिखा गया इतिहास, पराड़कर एकादश चैंपियन

  • संतोष यादव की 94 रनों की तूफानी पारी, फाइनल में हृदय प्रकाश एकादश को तीन विकेट से हराया 

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वाराणसी (सुरेश गांधी). डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, सिगरा की पिच पर जब आख़िरी गेंद फेंकी गई और कवर के ऊपर से गेंद सीमा रेखा पार कर गई, तो सिर्फ एक मैच नहीं जीता गया—बल्कि रोमांच, धैर्य और जज़्बे की एक यादगार दास्तान लिखी गई। सांसें थाम देने वाले इस महामुकाबले में पराड़कर एकादश ने 38वीं कनिष्क देव गोरावाला मीडिया क्रिकेट प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर लिया। काशी पत्रकार संघ से संचालित वाराणसी प्रेस क्लब के बैनर तले आयोजित आनंद चंदोला खेल महोत्सव के प्रथम चरण के अंतिम दिन, टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने उतरी हृदय प्रकाश एकादश ने रनों का पहाड़ खड़ा किया। 20 ओवर में चार विकेट पर 192 रन—मानो स्कोरबोर्ड पर आतिशबाज़ी छूट रही हो। अमित मिश्रा (47), इरफान (42), सोनू (41) और विजय (40) की पारियां किसी सधे हुए ऑर्केस्ट्रा की तरह एक-दूसरे से जुड़ी रहीं। गेंदबाज़ी में पराड़कर एकादश की ओर से सागर यादव ने दो विकेट लेकर प्रतिरोध किया।


लेकिन असली कहानी तो रनचेज़ में लिखी जानी थी। लक्ष्य बड़ा था, दबाव उससे भी बड़ा। ऐसे में क्रीज़ पर उतरे संतोष यादव—और फिर जो हुआ, वह क्रिकेट प्रेमियों के लिए कविता बन गया। 50 गेंदों पर 13 चौकों और एक गगनचुंबी छक्के से सजे 94 रन, कवर-प्वाइंट के बीच नफ़ासत, मिड विकेट पर ताक़त और फाइन लेग पर टाइमिंग का अद्भुत संगम। मिड विकेट में जड़ा गया उनका छक्का देर तक दर्शकों की स्मृति में गूंजता रहेगा। और जब जीत के लिए आख़िरी गेंद पर चार रन चाहिए थे, तब संतोष ने कवर की दिशा में गेंद को भेजकर पराड़कर एकादश को चैंपियन बना दिया। प्रशांत मोहन के अहम 31 रन भी इस जीत की मजबूत कड़ी बने। हृदय प्रकाश एकादश की ओर से पुरुषोत्तम ने तीन विकेट लिए, जबकि इरफान और सोनू को एक-एक सफलता मिली। पुरुषोत्तम चतुर्वेदी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़, प्रशांत मोहन सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ और सोनू सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए। मैच के बाद नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल (मुख्य अतिथि) और प्रमुख उद्योगपति मयंक अग्रवाल (विशिष्ट अतिथि) ने विजेता-उपविजेता टीमों को ट्रॉफी व व्यक्तिगत पुरस्कार प्रदान किए। समारोह में वाराणसी प्रेस क्लब और काशी पत्रकार संघ के पदाधिकारियों, वरिष्ठ पत्रकारों और खिलाड़ियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह फाइनल सिर्फ एक जीत नहीं था—यह क्रिकेट की उस आत्मा का उत्सव था, जहां आख़िरी गेंद तक उम्मीद ज़िंदा रहती है और एक शॉट इतिहास बन जाता है।

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