कोलकाता, तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को केंद्र सरकार पर संसद को ‘‘गुमराह’’ करने का आरोप लगाया और दावा किया कि केंद्र पर प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना ‘मनरेगा’ के तहत पश्चिम बंगाल का लगभग 52,000 करोड़ रुपये बकाया है। यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यसभा में तृणमूल की उपनेता सागरिका घोष और लोकसभा में पार्टी की उपनेता शताब्दी रॉय ने कहा कि मार्च 2022 में धनराशि रोके जाने से पहले पश्चिम बंगाल शीर्ष प्रदर्शन करने वाले मनरेगा राज्यों में से एक था। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस योजना में लगभग 1.37 करोड़ परिवार नामांकित हैं, जिनमें से लगभग 70 लाख परिवारों को हर साल काम मिलता था। इस सप्ताह लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दिए गए लिखित उत्तरों में, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि आठ मार्च, 2022 तक, जब योजना स्थगित कर दी गई थी, पश्चिम बंगाल के लिए मनरेगा के तहत कुल लंबित देनदारी 3,082.52 करोड़ रुपये है। इसमें मजदूरी के लिए 1,457.22 करोड़ रुपये, सामग्री के लिए 1,607.68 करोड़ रुपये शामिल हैं। हालांकि, टीएमसी नेताओं ने दावा किया कि पहले से किए गए काम के लिए बकाया राशि में मजदूरी घटक के तहत 3,700 करोड़ रुपये और गैर-मजदूरी घटक के तहत 3,200 करोड़ रुपये शामिल हैं। घोष ने कहा, ‘‘पहले से किए गए काम के लिए कुल बकाया 6900 करोड़ रुपये है।’’ उन्होंने कहा कि जिस समय योजना लागू नहीं की गई थी, उस अवधि के लिए केंद्र द्वारा देय अनुमानित बकाया मजदूरी घटक के तहत 28,400 करोड़ रुपये और गैर-मजदूरी घटकों के तहत 16,400 करोड़ रुपये होगा। घोष ने दावा किया, ‘‘कुल अनुमानित बकाया 44,800 करोड़ रुपये है। बंगाल के लिए मनरेगा का कुल बकाया 51,700 करोड़ रुपये है।’’ घोष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने काम के कानूनी अधिकार को बंगाल के ग्रामीण लोगों के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार में बदल दिया है।
शनिवार, 6 दिसंबर 2025
मनरेगा के तहत केंद्र पर पश्चिम बंगाल का लगभग 52,000 करोड़ रुपये बकाया : तृणमूल कांग्रेस
Tags
# देश
Share This
About आर्यावर्त डेस्क
देश
Labels:
देश
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
संपादकीय (खबर/विज्ञप्ति ईमेल : editor@liveaaryaavart या वॉट्सएप : 9899730304 पर भेजें)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें