- बेटियों-महिलाओं बढ़ रहा हमला- अपराध- हिंसा रोकने में भाजपा- जदयू की नई सरकार भी विफल
- ऐपवा जिलाध्यक्ष ने सदर अस्पताल का भ्रमण कर जाना महिलाओं का हाल

समस्तीपुर, 8 दिसंबर (रजनीश के झा)। भाजपा-जदयू की नई सरकार में भी बेटियों-महिलाओं पर धड़ल्ले से हिंसा-अपराध-हमला हो रहा है। घर पर रहने के कारण वे अपराधियों का सोफ्ट टारगेट हो रही हैं। वे घर से बाहर तक असुरक्षित हैं। सरकार का महिला सुरक्षा का दावा पूरी तरह से छलावा है। उक्त बातें महिला अधिकार कार्यकर्ता सह महिला संगठन ऐपवा के जिलाध्यक्ष बंदना सिंह ने कहा। वे रविवार एवं सोमवार को सदर अस्पताल का भ्रमण कर अस्पताल में भर्ती महिलाओं से मिलकर उनकी समस्या जानने की कोशिश की। मौके श्रीमती सिंह ने कहा कि एक विवाद में ताजपुर के पुरानी बाजार निवासी निर्मला केशरी, सुहानी आदि से मिली। घायलों ने बताया कि तीनों मां-बेटी को अपराधियों ने बुरी तरह पीटा। थोड़ी दूरी पर स्थित थाना पर पुलिस को बुलाने गये उनके पति शिव बालक केशरी को पुलिस ने डांट-डपट कर लौटा दिया। ठीक इसी तरह चाहे सिलौत या अन्य जगह का भूमि विवाद का मामला हो या फिर अतिक्रमण हटाने या समूह लोन वसूली आदि का मामला हो। उन्होंने दलसिंहसराय जेल उपाधीक्षक पर आरोप लगा रही महिला के साथ भी पुलिस न्याय नहीं कर सकी। अतिक्रमण हटाने के दौरान पुलिस-अधिकारी भी महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार करते दिखाई देते हैं। जिले में बेटियां-महिलाएं सामंती जुल्म-उत्पीड़न-अत्याचार का शिकार हो रही हैं और भाजपा-जदयू की नई सरकार महिला सुरक्षा का झूठा स्वांग रचती हैं। उन्होंने महिलाओं से महिला विरोधी सरकार के खिलाफ महिलाओं को न्याय दिलाने को संघर्ष का रूख अख्तियार करने का आह्वान करते हुए ऐपवा के बैनर तले महिला सुरक्षा के लिए पीड़ित महिलाओं को आगे लाकर आंदोलन चलाने की घोषणा की।
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