दिल्ली : शतकोत्तर स्मरण के साथ सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का वैचारिक संकल्प - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 3 जनवरी 2026

दिल्ली : शतकोत्तर स्मरण के साथ सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का वैचारिक संकल्प

  • अटल बिहारी वाजपेयी जी की शतकोत्तर जयंती और स्वर्गीय श्रीकांत शंकर जोशी जी के पुण्य स्मरण में नई दिल्ली में राष्ट्रीय वैचारिक संगोष्ठी

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नई दिल्ली | 3 जनवरी, (रजनीश के झा)। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की शतकोत्तर जयंती एवं श्रद्धेय स्वर्गीय श्रीकांत शंकर जोशी जी—पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ—के पावन पुण्य स्मरण के अवसर पर एक राष्ट्रीय स्तर का वैचारिक कार्यक्रम “पंच परिवर्तन” आज नई दिल्ली में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम भारत को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने हेतु सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित विमर्श को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मदरलैंड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम स्वर्गीय श्रीकांत शंकर जोशी जी के राष्ट्रनिष्ठ जीवन, वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक समर्पण को स्मरण करते हुए, उनके विचारों को समकालीन भारत की चुनौतियों और अवसरों से जोड़ने का एक विनम्र प्रयास है।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, माननीय केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी (रेलवे, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) ने अपने संबोधन में कहा, “पंच परिवर्तन का विचार भारत की संस्कृति, जन-जीवन और जीवनशैली में गहराई से समाया हुआ है। भारत पाँच हज़ार वर्ष पुरानी सांस्कृतिक परंपरा वाला राष्ट्र है, जिसने सदैव विश्व को दिशा दी है। आज भारत तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की ओर अग्रसर है, और इसके मूल में स्वदेशी सोच तथा पंच परिवर्तन की भावना निहित है।” उन्होंने कहा कि आज भारत में निर्मित टेलीकॉम और तकनीकी उपकरण पूरी दुनिया में निर्यात हो रहे हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य श्री इंद्रेश कुमार जी ने की। उन्होंने कहा,“ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसे कभी सपना न आया हो, लेकिन सपना कभी विदेशी भाषा में नहीं आता—वह हिंदुस्तानी भाव में ही आता है। ईश्वर, अल्लाह, खुदा, वाहेगुरु या परमात्मा—सत्य एक ही है। विविधता कोई संघर्ष नहीं, बल्कि सौंदर्य है; और यही सौंदर्य भारत की एकता की आधारशिला है।” एन.सी.एम.ई.आई. के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शाहिद अख्तर ने कहा,“हमें अपने आत्मबोध और पहचान को समझने की आवश्यकता है। हमारी सांस्कृतिक विरासत ही हमारी असली पूँजी है। शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि जीवन निर्माण और राष्ट्र सेवा होना चाहिए।” कार्यक्रम का मुख्य भाषण डॉ. डी.के. अग्रवाल, अध्यक्ष, मदरलैंड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन ने दिया। उन्होंने ‘पंच परिवर्तन’ को राष्ट्र निर्माण का व्यावहारिक मॉडल बताते हुए कहा कि यह विचार व्यक्ति से परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र के रूपांतरण का मार्ग प्रशस्त करता है।


कार्यक्रम में पंच परिवर्तन की अवधारणा को पाँच प्रमुख आयामों—सामाजिक समरसता (Social Harmony), कुटुंब प्रबोधन (Family Enlightenment), पर्यावरण (Environment), स्व (Swadeshi/Self-hood) का बोध, तथा नागरिक कर्तव्य (Civic Duties)—के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य वक्ताओं ने राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सुधार, मीडिया की भूमिका और नागरिक कर्तव्यों पर अपने विचार साझा किए। आयोजकों ने कहा कि “पंच परिवर्तन” केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक विचार-आधारित आंदोलन है, जो स्वर्गीय श्रीकांत शंकर जोशी जी एवं पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जैसे राष्ट्रसेवकों की वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प है। यह कार्यक्रम 3 जनवरी 2026 को अपराह्न 3:30 बजे, आकाशवाणी भवन, संसद मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जिसमें देशभर से आए बौद्धिकों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की व्यापक सहभागिता रही।

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