सीहोर : भागवत कथा में आस्था और उत्साह के साथ भगवान शिव-पार्वती विवाह महोत्सव - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 21 जनवरी 2026

सीहोर : भागवत कथा में आस्था और उत्साह के साथ भगवान शिव-पार्वती विवाह महोत्सव

  • मन की शुद्धि भगवान का ध्यान करने से होती है : कथा वाचक पंडित चेतन उपाध्याय

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सीहोर। परमात्मा का ध्यान करने से मन की शुद्धि होती है। भगवान का ध्यान किसी भी समय में हो सकता है, परंतु भगवान की पूजा किसी भी समय में नहीं हो सकती है। भगवान का ध्यान करने से जीव में ईश्वर के सद्गुण आते हैं। भगवान निर्दोष होने के साथ ही सर्व सदगुण संपन्न है। जो भगवान का ध्यान स्मरण करता है उस जीव में भगवान की शक्ति आती है। उक्त विचार शहर के प्राचीन इंदौर नाका स्थित श्री सिद्ध बटेश्वर महादेव मंदिर में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक पंडित चेतन उपाध्याय ने कही। उन्होंने कहाकि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह विश्वास और श्रद्धा का प्रतीक है।


पंडित श्री उपाध्याय ने कहाकि पर्वतराज हिमालय की घोर तपस्या के बाद माता जगदंबा प्रकट हुईं और उन्हें बेटी के रूप में उनके घर में अवतरित होने का वरदान दिया। बेटी के बड़ी होने पर पर्वतराज को उसकी शादी की चिंता सताने लगी। माता पार्वती बचपन से ही बाबा भोलेनाथ की भक्त थी। एक दिन पर्वतराज के घर महर्षि नारद पधारे और उन्होंने भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती के विवाह का संयोग बताया। उन्होंने कहा कि नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बरात लेकर पहुंचे तो उसे देखकर पर्वतराज और उनके परिजन अचंभित हो गए। लेकिन माता पार्वती ने खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार किया।


बुधवार को भागवत कथा के दौरान सती प्रसंग के अलावा भगवान शिव और मां पार्वती के विवाह का वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से की गयी प्रार्थना, कभी विफल नहीं होती। सब की पॉवर व्यर्थ हो जाती है। लेकिन प्रार्थना की पॉवर कभी व्यर्थ नहीं होती है। संसार का ध्यान छोड़ दो। सभी पाप संसार का ध्यान करने से होते हैं। ज्ञानीजन संसार में रहते हैं, लेकिन संसार का कभी ध्यान नहीं करते। ज्ञानी-संत हर समय में भगवान का ध्यान करते हैं। भगवान का ध्यान भले ही न करो, पर किसी मानव शरीर का ध्यान कभी नहीं करना चाहिए। शरीर को सुंदर समझना बड़ा अज्ञान है। भगवान का ध्यान करना चाहिए। पाप और पुण्य तत्काल फल नहीं देते हैं। कालांतर में फल देते हैं। पाप-पुण्य का फल भी तत्काल नहीं मिलता है। पाप और पुण्य कालांतर में फल देते है। भगवान की पूजा करें तो उस पूजा का प्रतिफल आज नहीं मिलेगा। यदि भगवान का कोई ध्यान करें तो उसका मन तुरंत शुद्ध हो जाता है।

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