- दस दिनों में छह लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने की यज्ञशाला की परिक्रमा, हेलीकॉप्टर से पुष्प और गंगा जल की श्रद्धालुओं पर वर्षा

सीहोर। शहर के प्रसिद्ध कराली माता मंदिर परिसर में दस दिवसीय सहस्त्र चंडी महायज्ञ का समापन हो गया है। यह धार्मिक अनुष्ठान विशाल भंडारे और पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। यह महायज्ञ दस दिनों तक चला, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजन स्थल पर धार्मिक माहौल बना रहा। इस पूरे धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन समस्त शहरवासियों के अलावा संयुक्त मां कालका उत्सव समिति के सहयोग से किया गया था। इस आयोजन को सफल बनाने में कार्यक्रम के अध्यक्ष विवेक राठौर, मुख्य यजमान सूत्रधार तरुण राठौर, यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महायज्ञ का समापन मंगलवार को विशाल भंडारे के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। रात्रि तक करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। हैलीकाप्टर से करीब छह राउंड में शहरवासियों को पुष्प, अभिमंत्रित अक्षत और गंगा जल की वर्षा की। इस संबंध में जानकारी देते हुए महायज्ञ के मीडिया प्रभारी प्रदीप समाधिया ने बताया कि दस दिनों तक जारी रहे इस महायज्ञ में शहर और देश भर से आए बड़ी संख्या में विप्रजनों ने माघ की गुप्त नवरात्रि में सयंक्त मां कालका उत्सव समिति और शहरवासियों के सहयोग से भगवती, प्रारम्बा, जगदम्बा की प्रसन्नता के लिए दुर्गा सप्तशती के पाठ एवं हवन इत्यादि मर्यादा के अंतर्गत किया और बड़ी संख्या में हवन में जोड़ों ने आहुतियां दी। वहीं करीब पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला की परिक्रमा की। दस दिनों तक समिति के द्वारा निरंतर नगर भोज की व्यवस्था की गई थी, जिसमें सभी वर्ण के श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। इस मौके पर संत दुर्गाप्रसाद कटारे, पूर्व विधायक रमेश सक्सेना, सतीश राठौर, रुद्र प्रकाश राठौर, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर, सुनील शर्मा, अजित शुक्ला, पंडित मोहितराम पाठक, वासूदेव शर्मा, शैलेश तिवारी, नरेश तिवारी, जितेन्द्र राठौर, हेमंत दरबार, दिपांशु राठौर, प्रतुल राठौर, अजय राठौर, प्रिंस राठौर छोटा, रामजी, भारत राठौर, विशाल राठौर आदि हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल थे।
हेलीकॉप्टर से पुष्प और गंगा जल की श्रद्धालुओं पर वर्षा
उन्होंने बताया कि दस दिवसीय महायज्ञ के समापन के पश्चात यहां पर मंदिर परिसर में शामिल श्रद्धालुओं ने हेलीकॉप्टर से पुष्प और गंगा जल की श्रद्धालुओं पर वर्षा की गई और मंदिर परिसर में महायज्ञ की वेद मंत्रों के साथ देवी की महाआरती के पश्चात भंडारे की प्रसादी का सिलसिला देर रात्रि तक जारी रहा।
मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियों को प्राप्त
महायज्ञ के यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था। मां सिद्धिदात्री की अनुकंपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी हो गया था और वह अर्धनारीश्वर कहलाएं, मां दुर्गा के नौ रूपों में यह रूप अत्यंत ही शक्तिशाली रूप है। कहा जाता है कि, मां दुर्गा का यह रूप सभी देवी-देवताओं के तेज से प्रकट हुआ है। कथा में वर्णन है कि जब दैत्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब वहां मौजूद सभी देवतागण से एक तेज उत्पन्न हुआ और उसी तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा जाता है।
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