कार्यशाला के दौरान सिविल सर्जन एवं जिला प्रोग्राम पदाधिकारी(आईसीडीएस) के द्वारा कार्यक्रम में शामिल छात्र/छात्राओं को बाल विवाह रोकने को लेकर शपथ दिलायी गयी। सिविल सर्जन, डॉ. हरेन्द्र कुमार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि किशोर-किशोरियों और समाज के प्रबुद्ध जनों को बाल विवाह के कानूनी, स्वास्थ्य संबंधी और सामाजिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने कम उम्र में होनेवाली विवाह से स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं पर भी प्रकाश डाला। जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, आईसीडीएस, ललिता कुमारी ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि बाल विवाह निषेध कानून के विभिन्न पहलुओं की जानकारी सभी नागरिकों को होनी चाहिए। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित पदाधिकारियों ने कहा कि बाल विवाह न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह बच्चों के सुनहरे भविष्य और उनके शारीरिक व मानसिक विकास में सबसे बड़ी बाधा है। 100 दिनों तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से जिले के हर कोने में यह संदेश पहुँचाने का कार्य किया जायेगा। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी सेविका, सहायिका एवं विद्यालय के शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और संबंधित विभाग के कर्मियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
मधुबनी, 09, जनवरी, (रजनीश के झा)। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान अंतर्गत 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को वाट्सन उच्च विद्यालय के सभागार में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के माध्यम से बाल विवाह की समाप्ति तथा बालिकाओं एवं महिलाओं में शिक्षा, कौशल और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने पर बल दिया गया। विदित हो कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 27 नवंबर 2025 से 08 मार्च 2026 तक 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान संचालित किया जाना है। यह अभियान तीन चरणों में शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों और स्थानीय निकायों की भागीदारी से किया जायेगा। मधुबनी में आज 09 जनवरी तथा 10 जनवरी को गहन जागरूकता अभियान के तहत कार्यशाला आयोजित की गई है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें