सीहोर : सहस्त्र चंडी महायज्ञ में सभी वर्ण एक साथ बैठकर कर रहे यज्ञ और नगर भोज में भोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 21 जनवरी 2026

सीहोर : सहस्त्र चंडी महायज्ञ में सभी वर्ण एक साथ बैठकर कर रहे यज्ञ और नगर भोज में भोजन

Mahayagya-sehore
सीहोर। शहर के प्राचीन करोली वाली माता मंदिर परिसर में सुबह से देर रात्रि ढाई बजे तक सहस्त्र चंडी महायज्ञ की परिक्रमों के लिए यहां पर आस्था और उत्साह दिखाई दे रहा है। शहर सहित देश भर के अनेक विप्रजनों के द्वारा सभी समाज के श्रद्धालु एक साथ यज्ञ और नगर भोज में भोजन प्रसादी ग्रहण करते है। सनातन धर्म को जोड़ने के लिए कराए जा रहे ऐतिहासिक महायज्ञ में चारों वर्ण के यजमानों को शामिल किया गया है। इसके अलावा शाम छह बजे से नगर भंडारे का आयोजन किया जाता है। जिसमें प्रतिदिन 10 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण करते है।   इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष विवेक राठौर, मुख्य यजमान सूत्रधार तरुण राठौर  और संयुक्त मां कालका उत्सव समिति ने क्षेत्रवासियों से महायज्ञ में शामिल होकर धर्म लाभ लेने की अपील की।


महायज्ञ के मीडिया प्रभारी प्रदीप समाधिया ने बताया कि महायज्ञ की पूर्णाहुति आगामी 27 जनवरी को की जाएगी। माघ गुप्त नवरात्रि के मौके पर ऐतिहासिक सहस्त्र चंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें समस्त शहरवासियों के सहयोग से भव्य और दिव्य अनुष्ठान किया जा रहा है। पहले दिन कलश यात्रा से आरंभ हुआ महायज्ञ दस दिनों तक जारी रहेगा। इसमें शाम छह बजे से भंडारे की प्रसादी आरंभ हो जाती है जो रात्रि ग्यारह बजे तक निरंतर जारी रहती है। महायज्ञ यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा ने बताया कि सहस्त्र चंडी महायज्ञ में दुर्गा सप्तशती के पाठों के साथ घी, हवन सामग्री, फल, फूल, नारियल और मिष्ठान जैसी विभिन्न वस्तुएं मंत्रोच्चार के साथ अग्नि में अर्पित की जा रही है। महायज्ञ से भक्तों को आर्थिक तंगी, पारिवारिक कलह और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। यह यज्ञ स्वास्थ्य, धन और सफलता के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना गया है, जिसका वर्णन दुर्गा सप्तशती के अध्याय में भी मिलता है। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में गुप्त नवरात्रि का पर्व भी आस्था के साथ मनाया जा रहा है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता चंद्रघंटा को राक्षसों की वध करने वाला कहा जाता है। ऐसा माना जाता है मां ने अपने भक्तों के दुखों को दूर करने के लिए हाथों में त्रिशूल, तलवार और गदा रखा हुआ है। माता चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र बना हुआ है, जिस वजह से भक्त मां को चंद्रघंटा कहते हैं। 

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