- पूनम ढिल्लों बनी कलाकारों के अधिकारों की मज़बूत ढाल, पूनम ढिल्लों का कलाकारों के हक़ में साहसिक कदम
समस्या यहीं खत्म नहीं होती। पहले शूटिंग शिफ्ट 8 घंटे की होती थी, जिसे अब बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया गया है। कई बार शूटिंग 15-16 घंटे तक चलती है, लेकिन इसके बावजूद अनेक प्रोड्यूसर्स एक्स्ट्रा टाइम का भुगतान नहीं करते। पैसे बचाने की होड़ में शूटिंग के दौरान मिलने वाली बुनियादी सहूलियतों की गुणवत्ता भी लगातार गिरती जा रही है। पूनम ढिल्लों का कहना था कि बड़े स्टार्स को इन समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि प्रोड्यूसर्स की कमाई उन्हीं से जुड़ी होती है, इसलिए उनकी सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। लेकिन टीवी इंडस्ट्री की असली रीढ़ कहे जाने वाले कैरेक्टर आर्टिस्ट आज भी बुनियादी अधिकारों के लिए जूझ रहे हैं। दोनों ने बताया कि इन मुद्दों को लेकर वे कई बार केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों व अधिकारियों से मिल चुकी हैं। कुछ प्रयास भी हुए, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अब तक ठोस कार्यान्वयन नहीं हो पाया है। इसी वजह से कलाकारों की तकलीफ़ें आज भी जस की तस बनी हुई हैं। इसके बावजूद, पूनम ढिल्लों ने उम्मीद की किरण जगाते हुए कहा कि उन्हें भरोसा है कि बहुत जल्द सरकार और शासन-प्रशासन उनके निवेदन पर गंभीरता से विचार करेगा और कलाकारों के हित में कोई ठोस व कारगर कदम उठाएगा। टीवी की इस चमकदार दुनिया के पीछे छुपे संघर्ष को उजागर करता यह सच, बदलाव की एक मज़बूत शुरुआत बन सकता है।

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