पटना : मजदूरों की आम हड़ताल के समर्थन में सड़क पर उतरे का. दीपंकर - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

पटना : मजदूरों की आम हड़ताल के समर्थन में सड़क पर उतरे का. दीपंकर

  • 3 कृषि कानूनों की तरह 4 श्रम कोड भी वापस लेने होंगे
  • ऐक्टू सहित केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित थी हड़ताल

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पटना, 12 फरवरी (रजनीश के झा)। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में आज भाकपा (माले) के महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पटना की सड़कों पर उतरे। डाकबंगला चौराहे पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए का. दीपंकर ने कहा कि मजदूरों की इस ऐतिहासिक हड़ताल को खेत मजदूरों, किसानों, छात्रों और नौजवानों का व्यापक समर्थन मिला है, जो सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 4 श्रम कोड मजदूरों को अधिकारविहीन बनाने और पूंजीपतियों की मनमानी को कानूनी संरक्षण देने की साजिश हैं। ये श्रम कोड मजदूरों को संगठित होने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने से कमजोर करने का प्रयास हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिस प्रकार किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन ने 3 कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार को मजबूर किया, उसी प्रकार मजदूरों के संघर्ष से 4 श्रम कोड भी वापस कराए जाएंगे।


मनरेगा के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून खेत मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को रोजगार की गारंटी देने के लिए बना था। मजदूर संगठनों की मांग है कि मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार और कम से कम 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित की जाए। लेकिन इसके विपरीत, मोदी सरकार ने मजदूरों के साथ विश्वासघात किया है और ऐसी नीतियां लागू की हैं जिनसे ग्रामीण बेरोजगारी और बढ़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देश की खेती-किसानी को बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अमेरिका के हितों के सामने गिरवी रख दिया है। कृषि क्षेत्र को विदेशी दबावों के लिए खोलना राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और देश की 60 प्रतिशत आबादी के जीवन पर सीधा आघात है। शिक्षा नीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से शिक्षा का निजीकरण बढ़ाया जा रहा है, संघीय ढांचे को कमजोर किया जा रहा है और आरएसएस की विचारधारा थोपने का प्रयास किया जा रहा है। सभा के अंत में उन्होंने आज की एकता को सलाम करते हुए व्यापक जनएकता को और मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मजदूर, किसान, छात्र और नौजवान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हों और संघर्ष को आगे बढ़ाएं।


ऐक्टू, खेग्रामस, अखिल भारतीय किसान महासभा, रसोइया संघ, आपदा मित्र, रात्रि प्रहरी सहित विभिन्न संगठनों के संयुक्त नेतृत्व में बुद्ध स्मृति पार्क से सैकड़ों की संख्या में मजदूरों, किसानों, छात्र-नौजवानों और स्कीम वर्कर्स ने जुलूस निकाला। यह जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए डाकबंगला चौराहे पर सभा में परिवर्तित हुआ। जुलूस का नेतृत्व ऐक्टू के आर.एन. ठाकुर, स्कीम वर्कर्स की नेता शशि यादव, खेग्रामस के धीरेन्द्र झा, किसान महासभा के उमेश सिंह, रसोइया संघ की सरोज चौबे, आपदा मित्र के रौशन कुमार, रणविजय कुमार, टेंपो चालकों के नेता मुर्तजा अली तथा जितेन्द्र कुमार आदि कर रहे थे। इस मार्च में पार्टी के राज्य सचिव कुणाल, मीना तिवारी, के.डी. यादव, शिवसागर शर्मा, कमलेश शर्मा, शहजादे आलम, पूर्व विधायक महबूब आलम, मनोज मंजिल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल थे। डाकबंगला चौराहे पर आयोजित सभा को सरोज चौबे, रौशन कुमार, शिवसागर शर्मा सहित अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। इसके पूर्व, सुबह 9 बजे ऑटो चालक संघ के नेतृत्व में स्टेशन रोड से एक जुलूस निकाला गया, जो शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए डाकबंगला चौराहे पर मुख्य कार्यक्रम में शामिल हुआ।

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