- “प्रधानमंत्री के क्षेत्र में लोकतंत्र पर हमला”, 451 बूथों की जांच में 9000 डुप्लीकेट नाम मिलने का दावा
- मंत्री रविंद्र जायसवाल बोले, लोकतंत्र को हाईजैक करने की रची गई साजिश
451 बूथों की जांच में खुली गड़बड़ियों की परतें
5 फरवरी को शहर उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के 388 क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 451 बूथों पर मतदाता सूची के स्वतः परीक्षण के दौरान यह मामला सामने आने का दावा किया गया। जांच में कथित तौर पर हजारों ऐसे मतदाताओं के नाम सामने आए, जो दो से पांच अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज पाए गए। मंत्री रविंद्र जायसवाल ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें विवाह के वर्षों बाद भी महिलाओं का नाम मायके और ससुराल दोनों स्थानों पर वोटर सूची में बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं 30 से 40 वर्ष की आयु पार कर चुकी हैं, लेकिन अभी भी पिता के नाम से मतदाता सूची में दर्ज हैं, जो गंभीर चुनावी अनियमितता की ओर संकेत करता है।“प्रधानमंत्री के क्षेत्र में लोकतंत्र पर हमला”
सर्किट हाउस में मीडिया से मुखातिब होते हुए मंत्री जायसवाल ने बेहद तीखे शब्दों में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में इस तरह की गड़बड़ी सामने आना लोकतंत्र को कमजोर करने की सुनियोजित साजिश है। यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की खतरनाक कोशिश हो सकती है।” उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी के बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) द्वारा फाइनल सूची जारी होने के बाद कराई गई विशेष जांच में यह कथित घोटाला सामने आया।
लाखों नाम हटने के बाद भी बच गए हजारों संदिग्ध वोटर
गौरतलब है कि वाराणसी जिले में विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई थी, जिसमें बड़े स्तर पर नाम हटाए गए थे। इस अभियान में जिले में 5.73 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिनमें मृतक, स्थानांतरित, अनुपस्थित और डुप्लीकेट मतदाता शामिल बताए गए थे। सबसे ज्यादा प्रभाव वाराणसी उत्तरी और कैंट विधानसभा क्षेत्रों में देखने को मिला, जहां क्रमशः 1.11 लाख और 1.12 लाख नाम काटे गए थे। कुल मिलाकर जिले में पहले मौजूद 31.53 लाख मतदाताओं में से 18 प्रतिशत से अधिक नाम हटाए गए थे। इसके बावजूद अब 9000 नए संदिग्ध मतदाताओं के सामने आने के दावे ने चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
आधार सत्यापन से होगी ‘फर्जी वोटिंग’ पर चोट!
मंत्री रविंद्र जायसवाल ने प्रशासन से मांग की है कि सभी संदिग्ध नामों का आधार कार्ड से लिंक कर सत्यापन कराया जाए और यदि किसी प्रकार की धांधली सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि “मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ होती है। इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पूरे चुनावी तंत्र को प्रभावित कर सकती है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।”
सियासत गरमाने के संकेत, चुनावी पारदर्शिता पर उठे सवाल
काशी जैसे राष्ट्रीय महत्व के संसदीय क्षेत्र में मतदाता सूची को लेकर उठे इस विवाद ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। विपक्ष और चुनावी एजेंसियों की प्रतिक्रिया अब इस मुद्दे की दिशा तय करेगी, लेकिन इतना तय है कि इस खुलासे के बाद मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी शुचिता पर बहस तेज होना तय माना जा रहा है। अब सबकी नजर जिला निर्वाचन प्रशासन की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मामला केवल काशी ही नहीं बल्कि पूरे चुनावी सिस्टम की पारदर्शिता से जुड़ा माना जा रहा है।


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