- इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल और श्रम कानूनों के विरोध में वाराणसी के भिखारीपुर में लंच ऑवर में सांकेतिक प्रदर्शन, किसान संगठनों व ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन
संघर्ष समिति के अनुसार इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन को संयुक्त मंच के तहत कई प्रमुख ट्रेड यूनियनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें इंटक, एटक, सीटू, एचएमएस, एआईयूटीयूसी, सीसीटीयू, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ तथा यूटीयूसी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति (नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स) ने भी केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे संशोधन बिल, उत्तर प्रदेश में जारी निजीकरण की प्रक्रिया तथा पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग को लेकर हड़ताल का आह्वान किया है। संघर्ष समिति के नेताओं ने दावा किया कि इस आंदोलन को देशभर के लगभग 25 करोड़ कर्मचारियों और मजदूरों का समर्थन मिल रहा है, जिससे बिजली कर्मियों का मनोबल बढ़ा है और वे निजीकरण के विरोध में संघर्ष को और तेज करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल कर्मचारियों के हितों की लड़ाई नहीं है, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र को सार्वजनिक नियंत्रण में बनाए रखने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है। बैठक को ई. मायाशंकर तिवारी, ई. एस.के. सिंह, ई. अवधेश मिश्रा, अंकुर पाण्डेय, राजेश सिंह, हेमन्त श्रीवास्तव, जयप्रकाश कुमार, रंजीत पटेल, धर्मेन्द्र यादव और पंकज यादव सहित कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया और आंदोलन को सफल बनाने के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया। बिजली कर्मियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें