इससे पूर्व, डॉ. संजीव कुमार, पाठ्यक्रम निदेशक एवं प्रमुख, फसल अनुसंधान प्रभाग ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का समग्र प्रतिवेदन एवं मूल्यांकन प्रस्तुत किया तथा प्रतिभागियों को उपलब्ध कराए गए प्रमुख अधिगम निष्कर्षों एवं प्रक्षेत्र-आधारित अनुभवों पर प्रकाश डाला तथा उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को धरातल पर उतारने के लिए किसानों को प्रेरित किया | कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रशिक्षण की व्यावहारिक उपयोगिता एवं प्रासंगिकता पर संतोष व्यक्त किया। डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन प्रभाग ने कविता के माध्यम से समेकित कृषि प्रणाली के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रतिभागियों से अपने-अपने खेतों में इसे व्यवहारिक रूप से अपनाने का आह्वान किया गया। समापन सत्र के अंतर्गत प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्रों के साथ-साथ कृषि इनपुट्स जैसे सब्जी एवं धान के बीज, प्रूनिंग कैंची, फावड़े आदि वितरित किए गए। पूरे सत्र का संचालन डॉ. अभिषेक कुमार, सह-पाठ्यक्रम निदेशक-सह-वैज्ञानिक द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे डॉ. शिवानी, पाठ्यक्रम समन्वयक एवं प्रधान वैज्ञानिक ने प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम की सफलता में योगदान देने वाले वैज्ञानिकों, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
पटना (रजनीश के झा)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में दिनांक 6 फरवरी 2026 को पूर्वोत्तर क्षेत्र विशेष के लिए “समेकित कृषि प्रणाली” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण-सह-प्रक्षेत्र भ्रमण कार्यक्रम (02-06 फरवरी, 2026) का समापन हुआ। इस कार्यक्रम में सिक्किम राज्य से आए कुल 27 कृषकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों के ज्ञान एवं कौशल को सुदृढ़ करते हुए टिकाऊ, संसाधन-दक्ष तथा विविधीकृत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना था। प्रतिभागियों को संबोधित करते संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने उत्पादन हानि को कम करने के लिए आवश्यकता के अनुरूप संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के साथ जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ताके माध्यम से स्मार्ट खेती पद्धतियों को अपनाना कृषि को अधिक दक्ष, सुदृढ़ तथा भविष्य-उन्मुख बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने किसानों की आय में वृद्धि के लिए कृषि-उद्यमिता, मूल्य संवर्धन तथा बाजार से जुड़ाव के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

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