वाराणसी : माघ मेले की पूर्णाहुति के बाद काशी लौटे ‘कुंभेश्वर महादेव’ - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 18 फ़रवरी 2026

वाराणसी : माघ मेले की पूर्णाहुति के बाद काशी लौटे ‘कुंभेश्वर महादेव’

  • दर्शन मात्र से मिलेगा कुंभ स्नान का पुण्य, काशी-प्रयाग की आध्यात्मिक परंपरा पुनः जीवंत 

Magh-mela-kashi
वाराणसी (सुरेश गांधी). सनातन आस्था की अखंड धारा को जोड़ने वाली दो दिव्य तीर्थ नगरीयों के आध्यात्मिक सेतु—भगवान कुंभेश्वर महादेव—माघ मेले की पूर्णाहुति के पश्चात पुनः श्री काशी विश्वनाथ धाम पधार चुके हैं। 45 दिवसीय पावन प्रवास के बाद प्रभु के काशी आगमन से भक्तिमय उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से संपूर्ण धाम गुंजायमान हो उठा। माघ मेले के दौरान भगवान कुंभेश्वर महादेव का विशेष प्रवास प्रयागराज में स्थापित परंपरा का जीवंत स्वरूप माना जाता है। सनातन मान्यताओं के अनुसार, वे स्वयं भगवान विश्वनाथ के ‘कुंभ स्नान स्वरूप’ हैं, जो प्रत्येक वर्ष माघ और कुंभ पर्व के दौरान प्रयाग क्षेत्र में विराजमान होकर कल्पवासियों एवं देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। इस वर्ष भी 01 जनवरी 2026 को विधि-विधान से पूजन के पश्चात उन्हें विशेष सम्मान के साथ प्रयाग भेजा गया था।


आज प्रातः ब्रह्म बेला में पावन त्रिवेणी संगम के दिव्य तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महादेव का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। श्रद्धा और भावनाओं से ओतप्रोत वातावरण में भक्तों ने प्रभु को भावभीनी विदाई दी। काशी पहुंचते ही मंदिर परिसर में पुष्प वर्षा, शंखनाद और वैदिक ऋचाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। तत्पश्चात शास्त्रोक्त विधि से विशेष पूजन, अभिषेक और आरती सम्पन्न कर भगवान को पुनः उनके निर्धारित स्थान पर प्रतिष्ठित किया गया। अर्चक विद्वानों के अनुसार, शास्त्रों में वर्णित है कि कुंभ पर्व के दौरान पवित्र नदियों में स्नान से जो पुण्य फल प्राप्त होता है, वही श्रद्धा और भक्ति से भगवान कुंभेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है। यह परंपरा काशी और प्रयाग की सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक निरंतरता का अनुपम प्रतीक मानी जाती है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अनुसार, अगले माघ मास तक भगवान कुंभेश्वर महादेव मंदिर परिसर के वायव्य कोण में स्थित श्री विघ्न विनाशक गणपति मंदिर में विराजमान रहेंगे, जहां श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन एवं पूजन कर सकेंगे। काशी में प्रभु के पुनः आगमन ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया है कि सनातन परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक एकात्मता की अमर धरोहर हैं। 

कोई टिप्पणी नहीं: