- दर्शन मात्र से मिलेगा कुंभ स्नान का पुण्य, काशी-प्रयाग की आध्यात्मिक परंपरा पुनः जीवंत
आज प्रातः ब्रह्म बेला में पावन त्रिवेणी संगम के दिव्य तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महादेव का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। श्रद्धा और भावनाओं से ओतप्रोत वातावरण में भक्तों ने प्रभु को भावभीनी विदाई दी। काशी पहुंचते ही मंदिर परिसर में पुष्प वर्षा, शंखनाद और वैदिक ऋचाओं के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। तत्पश्चात शास्त्रोक्त विधि से विशेष पूजन, अभिषेक और आरती सम्पन्न कर भगवान को पुनः उनके निर्धारित स्थान पर प्रतिष्ठित किया गया। अर्चक विद्वानों के अनुसार, शास्त्रों में वर्णित है कि कुंभ पर्व के दौरान पवित्र नदियों में स्नान से जो पुण्य फल प्राप्त होता है, वही श्रद्धा और भक्ति से भगवान कुंभेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है। यह परंपरा काशी और प्रयाग की सांस्कृतिक तथा आध्यात्मिक निरंतरता का अनुपम प्रतीक मानी जाती है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अनुसार, अगले माघ मास तक भगवान कुंभेश्वर महादेव मंदिर परिसर के वायव्य कोण में स्थित श्री विघ्न विनाशक गणपति मंदिर में विराजमान रहेंगे, जहां श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन एवं पूजन कर सकेंगे। काशी में प्रभु के पुनः आगमन ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया है कि सनातन परंपराएं केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक एकात्मता की अमर धरोहर हैं।

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