मधुबनी : जिले में 10 फरवरी से 1,35,848 लाभार्थियों को फ़ाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जायेंगी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

मधुबनी : जिले में 10 फरवरी से 1,35,848 लाभार्थियों को फ़ाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाई जायेंगी

  • फ़ाइलेरिया मुक्त मधुबनी बनाना हमारी प्राथमिकता - सिविल सर्जन
  • 11 फरवरी को मनाया जाएगा मेगा एम.डी.ए. कैंप लगाकर कराया जाएगा दवा सेवन

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मधुबनी, 9 फरवरी (रजनीश के झा)। फाइलेरिया रोग के उन्मूलन के लिए मधुबनी जिले में 10 फरवरी, 2026 से शुरू किये जा रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम के सफल किर्यान्वयन के लिए 9 फरवरी को जिले के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मॉडल अस्पताल में मीडिया सहयोगियों के लिए संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया । कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि 10 फरवरी से शुरू हो रहे सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम कार्यक्रम के दौरान सभी लाभार्थियों को फ़ाइलेरिया रोधी दवाएं खिलाना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों को फाइलेरिया रोधी दवाओं के सेवन के लिए 11 फरवरी को मेगा एम.डी.ए कैंप का आयोजन किया जाएगा जिसमे बूथ लगा कर समुदाय के सभी लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने दवा सेवन कराएंगे। इसके अतिरिक्त प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिवस तक घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा का सेवन कराया जाना सुनिश्चित करेंगे । जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर  डी. एस. सिंह ने बताया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं । रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी हैं। सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं और अगर किसी को दवा खाने के बाद मितली आये , चक्कर जैसे लक्षण होते हैं तो यह सुभ संकेत है। इसका मतलब है कि हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में  फाइलेरिया के परजीवी  मौजूद हैं, जोकि दवा खाने के बाद मर रहें हैं । उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान किसी लाभार्थी को दवा सेवन के पश्चात किसी प्रकार की कोई कठिनाई प्रतीत होती है तो उससे  निपटने के लिए हर ब्लॉक  में  रैपिड रेस्पोंस टीम तैनात रहेगी ।


एसीएमओ डॉ एस एन झा ने मीडिया सहयोगियों से संवाद करते हुए बताया कि 10 फरवरी से शुरू होने वाले  सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम कार्यक्रम में जिले के शहरी क्षेत्र के 1 से 45 वार्ड के कुल जनसंख्या 1,59,822 के विरुद्ध पात्र लाभार्थी 1,35,848  लाभार्थियों को कार्यक्रम  के दौरान फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डी.ई.सी एवं अल्बेंडाज़ोल की निर्धारित खुराक, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों  द्वारा घर-घर जाकर, अपने सामने खिलाई जाएगी। जिसके लिए जिले में 72 बूथ, 45 टीम, 9 सुपरवाइजर एवं 90 दलों का गठन किया गया है। दवाओं का वितरण बिलकुल भी नहीं किया जायेगा । इन दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है । 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को दवा नहीं खिलाई जाएगी। फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने, मीडिया सहयोगियों से  अनुरोध किया कि वे अपने समाचार पत्रों और चैनल के माध्यम से लोगों तक इस प्रकार सन्देश पहुंचाएं कि प्रत्येक लाभार्थी फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन स्वास्थ्यकर्मियों के सामने ही सुनिश्चित करें और इस कार्यक्रम में  उनका पूर्ण सहयोग करें । सी.डी.ओ. डॉक्टर जी एम ठाकुर ने फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। यह रोग संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के अनुसार फाइलेरिया,दुनिया भर में दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। यह संक्रमण लिम्फैटिक सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है और अगर इससे बचाव न किया जाए तो इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे: हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फेडेमा (अंगों में सूजन) और दूधिया सफेद पेशाब (काईलूरिया) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक भेदभाव सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर व्यक्ति लगातार 5 साल तक फाइलेरिया रोधी दवा खा लेता है तो पूरे जीवन उसे फाइलेरिया रोग होने की सम्भावना समाप्त हो जाती है । इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार, एसीएमओ डॉक्टर एस.एन झा, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर डी.एस.सिंह ,सीडीओ डॉ जी. एम.ठाकुर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज मिश्रा, पिरामल के धीरज सिंह,कुश कुमार, भीबीड डिंपू कुमार, अमर कुमार, सीफार के डिवीजनल कोऑर्डिनेटर अमन कुमार सहित अन्य  उपस्थित थे । 

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