वाराणसी : प्रदूषण घटेगा तो सुरक्षित होगा नारी स्वास्थ्य: ‘ईएसजी फॉर हर’ में उद्योग जगत को मिला स्पष्ट संदेश - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

वाराणसी : प्रदूषण घटेगा तो सुरक्षित होगा नारी स्वास्थ्य: ‘ईएसजी फॉर हर’ में उद्योग जगत को मिला स्पष्ट संदेश

  • शी शील्ड कॉन्क्लेव 2026 के तृतीय सत्र में विशेषज्ञों का मंथन – स्वच्छ ऊर्जा, सुरक्षित कार्यस्थल और निवारक स्वास्थ्य मॉडल को बताया भविष्य की दिशा

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वाराणसी (सुरेश गांधी). महिला स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक जिम्मेदारी के बीच बढ़ते संबंधों को केंद्र में रखते हुए शी शील्ड कांन्क्लेव 2026 के तृतीय सत्र में गंभीर और दूरगामी चर्चा हुई। “ईएसजी फॉर हर — उद्योग कैसे प्रदूषण घटाकर महिला स्वास्थ्य को सशक्त बना सकते हैं” विषय पर आयोजित इस सत्र में विशेषज्ञों ने स्पष्ट कहा कि पर्यावरण (Environment), सामाजिक उत्तरदायित्व (सोशल) और सुशासन (गवर्नेंस) यानी ESG के मानकों को यदि महिला-केंद्रित दृष्टिकोण से लागू किया जाए, तो यह केवल औद्योगिक सुधार नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकता है। सत्र में यह चिंता भी व्यक्त की गई कि वायु प्रदूषण, औद्योगिक रसायन, जल प्रदूषण और असुरक्षित कार्य परिस्थितियां महिलाओं के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही हैं। ऐसे में उद्योगों की भूमिका केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य-सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन के प्रति भी संवेदनशील होना होगा।


निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी से आएगा वास्तविक बदलाव

सत्र को संबोधित करते हुए निधि बंसल ने कहा कि जब तक घर और कार्यस्थल दोनों स्तरों पर समानता और समावेशन सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक स्थायी परिवर्तन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल कार्यबल का हिस्सा बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें नेतृत्व और नीति-निर्माण के केंद्र में लाना होगा। उन्होंने कहा, “जब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में होंगी, तब उद्योग की नीतियां अधिक संवेदनशील, संतुलित और टिकाऊ बनेंगी। महिला दृष्टिकोण ई एसजी को व्यवहारिक और प्रभावी बनाता है।”


अनुपालन नहीं, सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाएं ई एसजी 

रमेश नायर ने कहा कि कॉरपोरेट सेक्टर को ESG मानकों को केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। यह समाज और भविष्य के प्रति उद्योगों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा, सुरक्षित कार्यस्थल, मातृत्व सुरक्षा और स्वास्थ्य-केंद्रित नीतियां सीधे तौर पर महिला कर्मचारियों के जीवन को बेहतर बनाती हैं। यदि उद्योग प्रदूषण नियंत्रण को प्राथमिकता दें, तो इसका सकारात्मक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगा।


ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण से मजबूत होगा महिला सशक्तिकरण

मुदित कुमार सिंह (आईएफएस) ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और महिला आजीविका एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। स्थानीय स्तर पर सतत विकास मॉडल लागू करने से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और स्वास्थ्य जोखिम भी कम होते हैं। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी के बिना ईएसजी  का प्रभाव जमीन तक नहीं पहुंच सकता।


औद्योगिक प्रदूषण का सबसे अधिक असर महिलाओं की जैविक सेहत पर

डॉ. अंकुर मुतरे ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि औद्योगिक रसायनों और प्रदूषण का प्रभाव महिलाओं के हार्मोनल संतुलन, प्रजनन क्षमता और मातृ स्वास्थ्य पर गंभीर रूप से पड़ता है। उन्होंने उद्योगों से स्वास्थ्य प्रभाव आकलन (हेल्थ इम्पैक्ट  असेसमेंट) को अनिवार्य करने की अपील करते हुए कहा कि उत्पादन के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा को जोड़ना समय की मांग है।


निवारक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जिम्मेदारी साथ-साथ जरूरी

डॉ. संदीप ठाकर ने कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य नीति निवारक मॉडल पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने उद्योग, सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास को महिला स्वास्थ्य सुधार की सबसे प्रभावी रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि यदि प्रदूषण नियंत्रण और नियमित स्वास्थ्य जांच को औद्योगिक नीति का हिस्सा बनाया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों को प्रारंभिक स्तर पर रोका जा सकता है।


“हर” के दृष्टिकोण से ईएसजी  लागू करने पर ही मिलेगा व्यापक परिणाम

सत्र के अंत में विशेषज्ञों ने एक स्वर में कहा कि ESG को महिला-केंद्रित दृष्टिकोण से लागू करना ही भविष्य की दिशा है। इससे उद्योग प्रदूषण कम करने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी के नए मानक स्थापित कर सकते हैं। यह भी कहा गया कि आने वाले समय में उद्योगों का मूल्यांकन केवल उत्पादन क्षमता से नहीं बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी, कार्यस्थल सुरक्षा और सामाजिक प्रभाव से किया जाएगा। तृतीय सत्र ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि महिला स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास अब अलग-अलग विषय नहीं रहे, बल्कि एक साझा विकास मॉडल का हिस्सा बन चुके हैं—जहां स्वच्छ उद्योग ही स्वस्थ समाज की आधारशिला बनेंगे।

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