- आवारा व घायल पशुओं की सेवा को मिली वैश्विक सराहना, पेशेवर सफलता और सामाजिक संवेदना का संगम
कानून, संस्कृति और समाज के संगम पर सम्मान
सम्मान समारोह के दौरान भारत के केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री तथा संस्कृति एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने अपने कर-कमलों से सीए सुदेशना बसु को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब काशी की एक बेटी का नाम सामाजिक करुणा और सेवा के लिए गूंजा, तो यह क्षण केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल और काशी की सांस्कृतिक चेतना के लिए गौरवपूर्ण बन गया।
जब अकाउंट्स से आगे बढ़कर इंसानियत बोली
सीए सुदेशना बसु वर्षों से वाराणसी की सड़कों पर घायल, बीमार और त्यक्त पशुओं के उपचार, संरक्षण और पुनर्वास के लिए समर्पित रूप से कार्य कर रही हैं। व्यस्त पेशेवर जीवन के बावजूद उन्होंने यह सिद्ध किया कि संवेदनशीलता समय या सुविधा की मोहताज नहीं होती। कई बार आधी रात को घायल पशु के इलाज के लिए निकल पड़ना, स्वयं संसाधन जुटाकर उपचार कराना और समाज को पशु कल्याण के प्रति जागरूक करना—यह सब उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। उनकी यह सेवा न तो प्रचार की आकांक्षा से प्रेरित रही, न ही किसी मंच की अपेक्षा से। शायद इसी निस्वार्थ भाव ने उन्हें आज अंतरराष्ट्रीय सम्मान तक पहुंचाया।
काशी के लिए गौरव, समाज के लिए संदेश
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि पेशेवर उत्कृष्टता और सामाजिक जिम्मेदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। काशी, जो सदियों से करुणा, सह-अस्तित्व और जीवदया की भूमि रही है, आज उसी परंपरा को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ते हुए देख रही है। सीए सुदेशना बसु की यह उपलब्धि विशेष रूप से युवाओं और पेशेवर वर्ग के लिए प्रेरणा है कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक ऊंचाइयों में नहीं, बल्कि समाज के सबसे असहाय वर्ग—चाहे वह इंसान हो या पशु—के प्रति संवेदनशील होने में निहित है।
अंतरराष्ट्रीय मंच से उठा मानवीय स्वर
वर्ल्ड फोरम ऑफ अकाउंटेंट्स जैसे वैश्विक मंच पर जब पशु सेवा जैसे विषय को सम्मान मिला, तो यह सम्मेलन के उद्देश्य को भी व्यापक बनाता है। यह दर्शाता है कि आज की वैश्विक सोच केवल बैलेंस शीट और मुनाफे तक सीमित नहीं, बल्कि करुणा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व देती है। सीए सुदेशना बसु का सम्मान इस बात का प्रमाण है कि काशी केवल मोक्ष की नगरी ही नहीं, बल्कि करुणा की जीवंत प्रयोगशाला भी है—जहां सेवा, संवेदना और संस्कार आज भी सांस लेते हैं।

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