सीहोर : कथा के अंतिम दिवस निकाली भव्य शोभा यात्रा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 1 फ़रवरी 2026

सीहोर : कथा के अंतिम दिवस निकाली भव्य शोभा यात्रा

  • कल्याण करने वाली होती है शिव की आराधना : कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा

Shobha-yatra-sehore
सीहोर। भगवान शिव की कथा मानव जाति को सुख समृद्धि व आनंद देने वाली है क्योंकि भगवान शिव कल्याण एवं सुख के मूल स्त्रोत हैं। वे संपूर्ण विद्याओं के ईश्वर समस्त भूतों के अधीश्वर, ब्रह्मवेद के अधिपति तथा साक्षात परमात्मा हैं। भगवान भोलेनाथ की कथा में गोता लगाने से मानव को प्रभु की प्राप्ति होती है लेकिन कथा सुनने व उसमें उतरने में अंतर होता है। सुनना तो सहज है लेकिन इसमें उतरने की कला हमें केवल एक संत ही सिखा सकता हैं। उक्त विचार शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में नारी शक्ति महिला मंडल और मध्यप्रदेश अग्रवाल महासभा जिला इकाई सीहोर के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय शिव महापुराण के अंतिम दिवस कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने कहे। रविवार को भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। इस मौके पर यात्रा का अनेक स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने कहाकि  ज्ञान, धर्म, भक्ति का मूल है। पांच दान यश, मान, कीर्ति, नम्रता, सरल सत्य स्वयं परमात्मा है। कलयुग, कलयुग नहीं है बल्कि करयुग है। अर्थात जैसी करनी वैसी भरनी। जो तन देखता है, शरीर देखता है वह सक्षम नहीं है। सक्षम वहीं है जो मन को देखता है, भाव को देखता है। संसार में सब कुछ सपना है, नींद में जो देखा वो भी सपना है। यह सब असत्य है, सत्य स्वयं शिव है। परहित करो, सभी को जाग्रत करो, सम्मान करो, भजन करो, हॅंसते रहो, मस्त रहो, मुस्कराते रहो। भगवान कभी भेद नहीं करता। जीव मात्र एक ऐसा प्राणी है जो भेद करता है। इस मौके पर उन्होंने 12 ज्योर्तिलिंगों की कथा का संक्षिप्त में वर्णन किया।

 

शिव पार्वती की महिमा के बारे में बताया

 शिव पार्वती की महिमा के बारे में बताया। कथा के अंतिम दिन कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंगों का वर्णन करते हुए उन सबकी उत्पत्ति के कारण व उनकी महिमा को बताते हुए आज के युग में शिव शक्ति को सबसे अहम वह प्रबल बताया। भगवान शिव, जो स्वयं में महाकाल हैं, जिनका काल भी कुछ बिगाड़ नहीं सकता, जिनके दर्शन मात्र से मोक्ष प्राप्ति होती है। वह त्रिकालदर्शी हैं, भूत, भविष्य और वर्तमान के ज्ञाता हैं। पृथ्वी पर वह ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विद्यमान हैं। धार्मिक क्षेत्रों में अलग-अलग जगहों पर उनके 12 ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं, जिनके दर्शनों से लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, दुख दूर होते हैं, धन-संपदा, वैभव, प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति प्रतिदिन इन 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम जपता है, वह सभी कष्टों से मुक्त हो जाता है। उसके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। मनोकामना की पूर्ति के लिए इन ज्योतिर्लिंगों के नामों का जाप किया जाता। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव लोक कल्याण के लिए लिंग के रूप में वास हैं और भगवान शिव के बारह विग्रहों को द्वादश ज्योतिर्लिंग कहा जाता है। ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान शिव पापों का नाश करने वाले देव हैं तथा बड़े सरल स्वभाव के हैं। इनका एक नाम भोला भी है। 

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