- जब भारत बना मरीज़ सुरक्षा का ग्लोबल लीडर
डॉ. मधु ससिधर, प्रेसिडेंट एवं सीईओ, हॉस्पिटल्स डिविजन, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज़ लिमिटेड ने साझा स्वामित्व और संगठनात्मक जवाबदेहिता पर ज़ोर देते हुए कहा, “मरीज़ की सुरक्षा किसी एक विभाग या हितधारक की जिम्मेदारी नहीं है। यह लीडरशिप की जिम्मेदारी है, जिसे पूरे संगठन को अपनाना होगा।” वैश्विक परिप्रेक्ष्य रखते हुए डॉ. कार्सटन इंगल, सीईओ, इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर क्वालिटी इन हेल्थकेयर ने कहा कि मरीज़ सुरक्षा दशकों से एजेंडा का हिस्सा रही है, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। उन्होंने नेताओं से अपील करते हुए कहा, “यह मत पूछिए कि किसी ने क्या किया या क्या करना चाहिए था। यह पूछिए कि उन्होंने उस समय क्या सोचकर वह कदम उठाया।” डॉ. अतुल मोहन कोचर, सीईओ, नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ने मरीज़ सुरक्षा को सिर्फ़ तकनीकी नहीं, बल्कि नैतिक, सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “सिर्फ़ नीतियां बनाने से मरीज़ सुरक्षित नहीं होते। निष्पादन की दक्षता ज़रूरी है। हमें शून्य नुकसान के लक्ष्य को अपनाना होगा।” इंटरनेशनल हेल्थ डायलॉग 2026 का पहला दिन इस स्पष्ट संदेश के साथ समाप्त हुआ कि मरीज़ सुरक्षा अब विकल्प नहीं, बल्कि प्राथमिकता है और इस वैश्विक मिशन में भारत सिर्फ़ सहभागी नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता की भूमिका में खड़ा है।

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