- सजदों में सजी सुबह, मुहब्बत में डूबी शाम
- शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में देखने को मिली. नमाज़ के बाद लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे को “ईद मुबारक” कहा
बनारस : जहां हर इबादत में बसती है इंसानियत
काशी की सुबह इस बार भी अपनी परंपरा के अनुरूप आध्यात्मिक रंगों में रंगी रही। बड़ी ईदगाह, मदनपुरा, बड़ागांव, नई सड़क और दालमंडी जैसे इलाकों में नमाज़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह की हल्की ठंडक और अलसाई हवा के बीच जब “अल्लाहु अकबर” की गूंज फिजाओं में फैली, तो पूरा शहर जैसे एक ही सुर में झूम उठा। नमाज़ के बाद लोगों ने गले मिलकर एक-दूसरे को “ईद मुबारक” कहा। बच्चों के चेहरे पर ईदी की खुशी थी, तो बुजुर्गों की आंखों में संतोष—कि एक और रमज़ान मुकम्मल हुआ और समाज में भाईचारे की डोर और मजबूत हुई।
सुरक्षा और संवेदनशीलता : सतर्क प्रशासन, शांतिपूर्ण आयोजन
इस बार ईद के मौके पर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती, ड्रोन से निगरानी, सीसीटीवी कैमरों की पैनी नजर—हर पहलू पर खास ध्यान दिया गया। सड़कों पर नमाज़ न हो, इसके लिए पहले से ही दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जिसका पालन भी देखने को मिला। प्रशासन की इस सख्ती ने यह संदेश दिया कि त्योहार की खुशियां और कानून का सम्मान साथ-साथ चल सकते हैं।
जौनपुर : ऐतिहासिक अटाला मस्जिद और शाही ईदगाह में नमाज़ के दौरान अपार भीड़ उमड़ी। नमाज़ के बाद बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई।
गाजीपुर : गहमर, सैदपुर और शहर के विभिन्न हिस्सों में नमाज़ शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हुई। प्रशासन की मुस्तैदी साफ दिखी।
आजमगढ़ : मुबारकपुर और शहर की प्रमुख मस्जिदों में हजारों नमाज़ियों ने एक साथ इबादत की। बच्चों में उत्साह देखते ही बन रहा था।
मऊ और भदोही : कारपेट सीटी भदोही में ईद की खरीदारी का असर नमाज़ के बाद भी जारी रहा। मऊ में भी हर गली मोहल्ला उत्सव में डूबा नजर आया।
मिर्जापुर में इमामबाड़ा स्थित ईदगाह में ईद की नमाज अदा की गई। बड़ी संख्या में लोगों ने नमाज अदा की और एक दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी।
दुआओं में देश, समाज और इंसानियत
ईद की नमाज़ सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी है। उलेमा ने अपने खुत्बों में देश की तरक्की, समाज में शांति और आपसी भाईचारे की दुआ कराई। साथ ही, ज़कात और फितरा के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश भी दिया गया—ताकि खुशियां हर घर तक पहुंचे।
मिठास में घुला अपनापन
ईद की पहचान सिर्फ नमाज़ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसके बाद की खुशियों में भी झलकती है। घर-घर सेवइयां, शीरखुरमा और तरह-तरह के पकवान बने। रिश्तेदारों और दोस्तों के यहां जाने का सिलसिला शुरू हुआ, और हर मुलाकात में मिठास घुली रही। बच्चों को मिली “ईदी” ने इस खुशी को और खास बना दिया।

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