इससे पूर्व, कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अभय कुमार, प्रधान अन्वेषक, जलवायु अनुकूल कृषि ने स्वागत भाषण देते हुए बैठक के उद्देश्यों एवं वर्तमान वर्ष में हुई प्रगति की जानकारी दी। इसके पश्चात डॉ. देवकरण, प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर ने बक्सर जिले तथा डॉ. राकेश कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने गया जी जिले में चल रही गतिविधियों की संक्षिप्त प्रस्तुति दी, जिनमें उन्होंने जमीनी स्तर पर जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के क्रियान्वयन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए तथा बताया कि इन हस्तक्षेपों ने किसानों को किस प्रकार लाभान्वित किया है। बैठक में लगभग 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 10 किसान शामिल थे। इनमें गया जी जिले के अमेठी गाँव के श्री रंजीत महतो ने जल संकट से निपटने हेतु फसल विविधीकरण, फलदार वृक्षों की खेती, रेज्ड बेड पर मक्का उत्पादन, मशरूम उत्पादन एवं फसल अवशेष मल्चिंग जैसे उपायों को अपनाने का अपना अनुभव साझा किया। उनके प्रयासों को जमीनी स्तर पर जलवायु अनुकूल कृषि के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में सराहा गया। कार्यक्रम के अंतर्गत एक प्रक्षेत्र भ्रमण भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने समेकित कृषि प्रणाली मॉडल, पोषण वाटिका तथा संस्थान के अन्य प्रायोगिक प्रक्षेत्रों का अवलोकन किया और जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के अंतर्गत चल रहे प्रदर्शनों एवं अनुसंधान गतिविधियों को देखा। बैठक का समापन वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं एवं किसानों के समन्वित प्रयासों से क्षेत्र में जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को और सुदृढ़ करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। अंत में डॉ. धीरज कुमार सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
पटना (रजनीश के झा), 30 मार्च। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में दिनांक 30 मार्च, 2026 को “जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम” पर हितधारकों की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में वैज्ञानिकों, परियोजना कर्मियों तथा बिहार के गया जी एवं बक्सर जिलों के किसानों ने भागीदारी की। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने की। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकों का आंशिक कार्यान्वयन अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकता है । इस संदर्भ में उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अवशेष प्रबंधन के बिना शून्य जुताई अपनाने से सही परिणाम प्राप्त नहीं होंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि विशिष्ट समस्याओं के समाधान हेतु कार्य-योजना तैयार की जानी चाहिए तथा विभिन्न हितधारकों को शामिल करते हुए रणनीतियाँ विकसित की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने किसानों की समस्याओं के अनुरूप प्रशिक्षण पुस्तिकाओं के विकास, गाँव स्तर पर “जलवायु प्रतिक्रिया समूह” के गठन तथा किसानों की परिस्थितियों के अनुसार प्रौद्योगिकियों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि कार्यक्रम के क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाया जा सके। उन्होंने सूखा, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तथा घटती मृदा उर्वरता जैसी जलवायु परिवर्तन जनित चुनौतियों के प्रति कृषि सहिष्णुता बढ़ाने की रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की। इसके साथ ही, उन्होंने फसल विविधीकरण के महत्व को रेखांकित करते हुए किसानों को समेकित कृषि प्रणाली अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्री धर्मेंद्र कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी, बक्सर ने अपने संबोधन में किसानों को बताया कि जलवायु अनुकूल तकनीकें न केवल उत्पादन बढ़ाती हैं, बल्कि जल, मृदा एवं श्रम जैसे प्राकृतिक संसाधनों की भी बचत करती हैं, जिससे खेती की लागत में कमी आती है। उन्होंने किसानों को स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी जिससे उनकी आय में वृद्धि हो । बैठक के दौरान सूखा, टर्मिनल हीट, जल उत्पादकता, फसल चक्र प्रणाली, मृदा उर्वरता प्रबंधन तथा जलवायु सहिष्णु किस्मों के प्रसार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए सीमित सिंचाई सुविधा, जंगली जानवरों का प्रकोप तथा कृषि यंत्रों की अनुपलब्धता जैसी प्रमुख समस्याओं को रेखांकित किया। इन चुनौतियों के बावजूद किसानों ने जलवायु अनुकूल कृषि हस्तक्षेपों के सकारात्मक प्रभाव को स्वीकार किया, जिससे उनकी कृषि प्रणाली में सुधार हुआ है।

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