- बेतिया के किसानों के बीच टीकाकृत बकरियों का वितरण एवं बकरी पालन पर वैज्ञानिक परिचर्चा
कार्यक्रम के दौरान डॉ. पी. सी. चंद्रन ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकता है, बशर्ते किसान उचित प्रबंधन और पशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने बताया कि बकरियों में कई संक्रामक रोग जैसे पीपीआर (बकरी प्लेग), खुरपका-मुंहपका तथा गोट पॉक्स होते हैं, जो बकरी पालकों के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। इन बीमारियों के लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से समय पर परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों के समक्ष बकरियों में पीपीआर रोग की रोकथाम के लिए टीकाकरण का प्रदर्शन भी किया। किसानों की आय में सुधार के उद्देश्य से लगभग 50 किसानों के बीच टीकाकृत बकरियों का वितरण किया गया। टीकाकरण से बकरियों में रोग फैलने की संभावना कम हो जाती है तथा मृत्यु दर में भी कमी आती है। इस प्रकार किसान बकरियों की संख्या बढ़ाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। इस अवसर पर डॉ. रोहन कुमार रमण ने किसानों को बकरियों के संतुलित आहार, साफ-सफाई, उचित आवास तथा रोगों की पहचान के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बकरियों में आंतों के कीड़े (परजीवी) उत्पादन और वजन बढ़ने पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। इसलिए सभी किसानों को कीड़े नष्ट करने वाली दवाओं का भी वितरण किया गया तथा उनके उपयोग की जानकारी दी गई। डॉ. विवेकानंद भारती ने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीकों को अपनाएं तो बकरी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला व्यवसाय बन सकता है। उन्होंने बताया कि बेतिया क्षेत्र के किसानों के लिए ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरी पालन विशेष रूप से लाभकारी है। इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों के बीच ब्लैक बंगाल नस्ल की बकरियों का वितरण किया गया। बेतिया में इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में बृजना फाउंडेशन की प्रधान श्रीमती तन्वी शुक्ला का सराहनीय सहयोग रहा। उन्होंने भी किसानों को बकरी पालन अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर संस्थान के तकनीकी अधिकारी श्री संजय राजपूत भी उपस्थित रहे।

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