पटना : दलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति” विषयपर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 12 मार्च 2026

पटना : दलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति” विषयपर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

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पटना (रजनीश के झा), 12 मार्च। कृषि अनुसंधान परिसर में “बिहार में दलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति” विषयपर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्नमेड़ पर अरहर लगाकर बढ़ाएँ आय और मिट्टी की उर्वरता : डॉ.अनुप दासदलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण : डॉ.अनुप दास  भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वीअनुसंधान परिसर,पटना में “बिहार में दलहन उत्पादन बढ़ाने की रणनीति” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय (10–12 मार्च, 2026) प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बामेती,पटना द्वारा प्रायोजित था।कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों तथा प्रसार कर्मियों के ज्ञान एवं कौशल का विकासकरना था, ताकि बिहार में दलहन उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकोंको अपनाया जा सके।  तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीयकृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना; भा.कृ.अनु.प.–भारतीयदलहन अनुसंधान संस्थान, कानपूर; राष्ट्रीयबीज निगम, पटना; रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषिविश्वविद्यालय तथा भा.कृ.अनु.प.–राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो, मऊ के वैज्ञानिकों ने किसानों तथा प्रसार कर्मियों को सैद्धांतिक एवंप्रायोगिक जानकारी प्रदान की। समापन कार्यक्रम के अवसर पर संस्थान केनिदेशकडॉ. अनुप दास ने बताया कि दलहनी फसलेंकृषि प्रणाली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि धान की कटाई के बादखेत में अवशेष को सुरक्षित रखते हुए उन्नत तकनीकों—जैसे बेहतर बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य सुधार तथा जल प्रबंधन को अपनाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।उन्होंने किसानों को मेड़ पर अरहर जैसी दलहनी फसल लगाने की सलाह दी, जिससे अतिरिक्त आय के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार होता है।उन्होंने बताया कि दलहनी फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी कीगुणवत्ता बढ़ाती हैं तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में भी सहायक होतीहैं। उन्होंने यह भी कहा कि बीज उपचार के प्रसार में विस्तार कर्मियों की भूमिकाअत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्हें प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को अपने-अपनेक्षेत्रों में किसानों तक पहुँचाना चाहिए।डॉ. उज्ज्वल कुमार,प्रभागाध्यक्ष, सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार नेबताया कि दलहन उत्पादन में गुणवत्तायुक्त बीज की उपलब्धता एक प्रमुख चुनौती है।उन्होंने किसानों को उन्नत किस्में अपनाने, सामूहिक बीजउत्पादन करने तथा सीड हब जैसी पहलों का लाभ लेने की सलाह दी। डॉ. आशुतोष उपाध्याय,प्रभागाध्यक्ष, भूमि एवं जल प्रबंधन ने बतायाकि बेहतर दलहन उत्पादन के लिए बीजोपचार, संतुलित उर्वरकप्रबंधन और समय पर बुवाई अत्यंत आवश्यक है। डॉ. संजीव कुमार, प्रभागाध्यक्ष, फसल अनुसंधान ने कहा कि दलहनशाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत है। उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानोंको गुणवत्तायुक्त बीज, समय पर बुवाई तथा उचित फसल प्रबंधनअपनाना चाहिए।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों नेमसूर एवं चना में उकठा रोग,गुणवत्तायुक्त बीज की कमी तथा नीलगाय से होने वाले नुकसानजैसी समस्याओं का उल्लेख किया। किसानों ने बताया कि प्रशिक्षण से उन्हें शून्यजुताई, बीज उपचार तथा वैज्ञानिक खेती की कई उपयोगी तकनीकों की जानकारी मिली।कार्यक्रम के दौरान भोजपुर जिले केप्रगतिशील किसानश्री राधेश्याम पांडेय द्वारा“मिट्टी” विषय पर प्रस्तुत कविता ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। तीनदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पाठ्यक्रम निदेशक डॉ.अरविंद कुमार चौधरी (प्रधान वैज्ञानिक) की महत्वपूर्णभूमिका रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुमारी शुभा ने किया,जबकि अंत में डॉ. अभिषेक कुमार दुबे ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। संस्थान के मीडिया सदस्य सचिव श्री उमेश कुमार मिश्र ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में बिहार केपाँच जिलों पटना,औरंगाबाद, नालंदा, भोजपुरतथा गया से आए प्रसार कर्मियों एवं किसानों ने भाग लिया। कुल 20 प्रतिभागियों में 04सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक, 01 प्रखंडप्रौद्योगिकी प्रबंधक,06 किसान सलाहकार तथा 09 प्रगतिशील किसान शामिल थे।

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