- रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट की यह फिल्म 14 मार्च को एंड पिक्चर्स पर आ रही है
फिल्म में भूमि पेडनेकर, संजय मिश्रा, आदित्य श्रीवास्तव और सई ताम्हणकर जैसे दमदार कलाकार नजर आते हैं। पुलकित के निर्देशन में बनी और रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट के बैनर तले तैयार इस फिल्म की कहानी में तीखापन भी है और गहराई भी। यह सिर्फ एक जांच-पड़ताल की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की जिम्मेदारी को भी सामने लाती है, जो इंसाफ के लिए आवाज उठाने का फैसला करते हैं। दमदार एक्टिंग और सच्ची घटनाओं से जुड़ी कहानी के साथ ये फिल्म दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ने का वादा करती है। भूमि पेडनेकर कहती हैं, “जब मैंने पहली बार ‘भक्षक’ की स्क्रिप्ट पढ़ी, तो उसकी कहानी ने मुझे गहराई से छू लिया। यह उन पत्रकारों की हिम्मत को दिखाती है, जो सच को सामने लाने के लिए सब कुछ दाँव पर लगा देते हैं। मेरा किरदार ऐसे इंसान का है, जो अन्याय देखकर चुप नहीं बैठती। यह रोल भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि इसका विषय बहुत वास्तविक और संवेदनशील है। लेकिन, हमारे लिए यह जरूरी था कि इस कहानी को पूरी ईमानदारी के साथ बताया जाए। यह ऐसी कहानी है, जिस पर पुलकित, रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट की टीम और मैंने सच्चे दिल से भरोसा किया। और मुझे गर्व है कि मैं ऐसी फिल्म का हिस्सा हूँ, जो सवाल पूछने के महत्व और उन लोगों के लिए खड़े होने की ज़रूरत को सामने लाती है, जिनकी आवाज़ अक्सर अनसुनी रह जाती है।”
डायरेक्टर पुलकित कहते हैं, “भक्षक के साथ हमारी कोशिश एक ऐसी कहानी कहने की थी, जो असरदार हो और सच्चाई के करीब भी रहे। शुरू से ही हमारा इरादा इस विषय को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ दिखाने का था। ऐसी कहानियाँ ज़रूर सुनाई जानी चाहिए, क्योंकि ये उन मुद्दों पर रोशनी डालती हैं, जो अक्सर छुपे रह जाते हैं। भूमि से लेकर बाकी कलाकारों और पूरी टीम के साथ-साथ रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट की टीम ने भी पूरी लगन के साथ काम किया, ताकि कहानी अपनी प्रामाणिकता बनाए रखते हुए दर्शकों के लिए प्रभावशाली और रोचक भी बनी रहे।” ‘भक्षक’ एक ऐसी जुझारू पत्रकार की कहानी है, जो एक चौंकाने वाले मामले की जाँच शुरू करती है। यह ऐसा मामला है, जिसे बहुत से लोग नजरअंदाज करना चाहते हैं। जैसे-जैसे वो गहराई में जाती है, कई परेशान करने वाली सच्चाइयाँ सामने आने लगती हैं और यह भी पता चलता है कि कुछ ताकतवर लोग इस मामले को दबाए रखना चाहते हैं। हर कदम के साथ दबाव बढ़ता जाता है और खतरे भी बड़े होते जाते हैं। धीरे-धीरे यह जाँच सच और चुप्पी के बीच एक सीधी टक्कर में बदल जाती है। लेकिन, सवाल वही रहता है, क्या सच आखिर सामने आएगा या फिर हमेशा के लिए दबा दिया जाएगा?

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें