कार्यक्रम में बोलते हुए काजल जावला, आईएएस, कलेक्टर, जिला पंचायत, ने परिवारों से बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा, “लोग अक्सर पूछते हैं- ‘लड़कियाँ पढ़कर क्या करेंगी, क्या वे कलेक्टर बनेंगी?’ मेरा जवाब है- क्यों नहीं? मैं भी एक किसान परिवार से आती हूँ। सीमित संसाधनों के बावजूद मेरे माता-पिता ने हमें पढ़ने का अवसर दिया। उनके विश्वास और समाज के सहयोग से मैं अपना कलेक्टर बनने का सपना पूरा कर पाई। मैं सभी माता-पिता से कहना चाहती हूँ कि वे अपनी बेटियों को पढ़ाएँ और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का अवसर दें। एक शिक्षित बेटी अपना जीवन ही नहीं, पूरे समाज का भविष्य बदल सकती है।” संगठन को बधाई देते हुए पद्मा विलोचन शुक्ला, आईपीएस, ने कहा, “एजुकेट गर्ल्स को मैं दिल से बधाई देता हूँ। मैंने झाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्रों में काम किया है, जहाँ प्रवासन के कारण कई बच्चों को अपने माता-पिता के साथ मजदूरी के लिए जाना पड़ता है और उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि हम बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करें। जब बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ते हैं, तो वे अपने परिवार, राज्य और देश का नाम रोशन करते हैं।”
प्रगति कार्यक्रम के माध्यम से ‘सेकंड-चांस’ शिक्षा
कार्यक्रम की एक खास झलक उन शिक्षार्थियों का सम्मान था, जिन्होंने प्रगति कार्यक्रम के माध्यम से कक्षा 10 की परीक्षा पास की। प्रगति, एजुकेट गर्ल्स का सेकंड-चांस शिक्षा कार्यक्रम है, जो 15–29 वर्ष के उन शिक्षार्थियों के लिए है, जो किसी कारण से पढ़ाई छोड़ चुके थे। गाँवों में चलने वाले लर्निंग कैंप्स के माध्यम से यह कार्यक्रम पढ़ाई के साथ-साथ जीवन कौशल और आत्मविश्वास भी विकसित करता है, ताकि शिक्षार्थी राज्य ओपन स्कूल के माध्यम से कक्षा 10 की परीक्षा दे सकें। इस वर्ष 6,000 से अधिक शिक्षार्थियों का कक्षा 10 की परीक्षा के लिए नामांकन हुआ है। वर्ष 2017 से एजुकेट गर्ल्स के विद्या कार्यक्रम के माध्यम से चार लाख से अधिक लड़कियाँ और युवतियाँ माध्यमिक शिक्षा में दोबारा जुड़ सकी हैं। पिछले वर्ष शुरू हुआ प्रगति कार्यक्रम उन शिक्षार्थियों के लिए नए अवसर बना रहा है जो पहले पढ़ाई छोड़ चुके थे। इस कार्यक्रम में 21 शिक्षार्थी, 26 प्रेरक और 20 टीम बालिका स्वयंसेवक के साथ कई साझेदार और समुदाय के सदस्य शामिल हुए। सम्मानित की गई कई शिक्षार्थियों ने सामाजिक बाधाओं, घरेलू जिम्मेदारियों और पढ़ाई में लंबे अंतराल जैसी चुनौतियों को पार किया है। कई लड़कियों के लिए यह उनकी उपलब्धियों की पहली सार्वजनिक पहचान थी, जिसने उनके गाँवों की अन्य लड़कियों को भी पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में एक पैनल चर्चा भी हुई, जिसका संचालन विक्रम सोलंकी, निदेशक– संचालन ने किया। इसमें शिक्षार्थियों, टीम बालिका स्वयंसेवकों और प्रेरकों ने अपनी शिक्षा की यात्रा साझा की।

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