वाराणसी : सिलेंडर की टेंशन खत्म! काशी में ‘घर-घर पीएनज’ क्रांति - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 25 मार्च 2026

वाराणसी : सिलेंडर की टेंशन खत्म! काशी में ‘घर-घर पीएनज’ क्रांति

  • एलपीजी की अनिश्चितता के बीच प्रशासन-गेल का मास्टर प्लान, 1.23 लाख घरों तक पहुंची पाइपलाइन, रोज 130 परिवार जुड़ रहे नई व्यवस्था से

Png-in-varanasi
वाराणसी (सुरेश गांधी)। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच अब इसका सीधा प्रभाव आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग, डिलीवरी और बदलते नियमों से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए अब काशी में एक स्थायी समाधान आकार ले रहा है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को घर-घर पहुंचाने का अभियान तेज कर दिया गया है, जो आने वाले समय में शहर की ऊर्जा व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है। मंडलायुक्त सभागार में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में कमिश्नर एस. राजलिंगम और गेल इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एच.के. गर्ग ने इस योजना को लेकर विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वाराणसी को चरणबद्ध तरीके से एलपीजी निर्भरता से मुक्त कर निरंतर, सुरक्षित और सस्ती गैस आपूर्ति प्रणाली की ओर बढ़ाया जा रहा है। मतलब साफ है वाराणसी अब पारंपरिक गैस व्यवस्था से आगे बढ़कर एक आधुनिक, सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा मॉडल की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। एलपीजी की अनिश्चितताओं के बीच पीएनजी का यह विस्तार न केवल शहरवासियों को राहत देगा, बल्कि आने वाले समय में काशी को देश के अग्रणी ऊर्जा-स्मार्ट शहरों में भी शामिल कर सकता है।  


नोएडा के बाद सबसे बड़ा पीएनजी नेटवर्क, काशी बनी मॉडल सिटी

वाराणसी अब उत्तर प्रदेश में पीएनजी नेटवर्क के विस्तार में दूसरा सबसे बड़ा शहर बन चुका है। शहर में करीब 1442 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है, जिससे बड़ी संख्या में घर सीधे जुड़ चुके हैं।

1.23 लाख से अधिक घरों तक पाइपलाइन पहुंची

करीब 70 हजार घरों में गैस का नियमित उपयोग

53 हजार से अधिक घर कनेक्शन के लिए तैयार


गेल अधिकारियों के अनुसार, जिन इलाकों में पाइपलाइन पहले से मौजूद है, वहां तेजी से कनेक्शन दिए जा रहे हैं, जबकि मांग के आधार पर नए क्षेत्रों में भी विस्तार किया जा रहा है।


तेजी से बदल रही रसोई, रोज 130 घर जुड़ रहे पीएनजी से

एलपीजी की अनिश्चितता को देखते हुए प्रशासन और गेल इंडिया ने कन्वर्जन प्रक्रिया को मिशन मोड में शुरू कर दिया है। प्रतिदिन करीब 130 घरों को पीएनजी से जोड़ा जा रहा है. डीएलडब्ल्यू, बीएचयू, सुंदरपुर, चितईपुर, पांडेयपुर, शिवपुर और सारनाथ जैसे इलाकों में तेजी से काम हो रहा है, जहां पाइपलाइन का काम जारी है, वहां विशेष कैंप लगाकर ऑन-द-स्पॉट कनेक्शन दिए जा रहे हैं. यह अभियान न केवल गैस आपूर्ति को स्थिर बनाएगा, बल्कि उपभोक्ताओं को बार-बार सिलेंडर बदलने की परेशानी से भी मुक्त करेगा।


सस्ती, सुरक्षित और बिना झंझट की गैस

पीएनजी को एलपीजी के मुकाबले ज्यादा किफायती और सुविधाजनक बताया गया है। कोई बुकिंग नहीं, कोई वेटिंग नहीं, सिलेंडर खत्म होने का डर खत्म, मीटर आधारित बिलिंग, जितना उपयोग, उतना भुगतान. लगभग 47 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर की दर, जो एलपीजी से सस्ती पड़ती है. इसके अलावा पाइपलाइन के जरिए गैस आपूर्ति होने से सुरक्षा के मानक भी अधिक मजबूत होते हैं.


क्यूआर कोड से आसान कनेक्शन, 24 घंटे में शुरू सेवा

गेल इंडिया ने उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना दिया है। क्यूआर कोड स्कैन कर सीधे रजिस्ट्रेशन और पेमेंट किया जा सकता है. पहली बिल में 500 रुपये का चार्ज शामिल है. 1 रुपये प्रतिदिन सर्विस शुल्क, पाइपलाइन उपलब्ध होने पर 24 घंटे के भीतर गैस सप्लाई शुरू हो जायेगी. इससे अब उपभोक्ताओं को एजेंसियों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


पुरानी काशी में भी जल्द पहुंचेगी सुविधा

कमिश्नर एस. राजलिंगम ने बताया कि शहर के अधिकांश हिस्सों में नेटवर्क तैयार है, लेकिन घनी आबादी वाले पुराने शहर में अभी पाइपलाइन का काम शुरू होना बाकी है। जल्द ही वहां अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू होगा. नेटवर्क पूरा होते ही कई इलाकों को एलपीजी मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाएगा.


भविष्य में पीएनजी कनेक्शन को अनिवार्य बनाने की तैयारी

व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए भी बड़ा विकल्प होगा. होटल, रेस्टोरेंट और छोटे-बड़े उद्योगों को भी च्छळ से जोड़ने की योजना है।

शुरुआती शुल्क 5000 से 8000 रुपये 

उपयोग के आधार पर बिलिंग

बड़े उपभोक्ताओं के लिए विशेष तकनीकी प्रावधान

एलपीजी संकट पर प्रशासन सतर्क


हालांकि बाजार में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है, लेकिन प्रशासन ने किसी भी तरह के आधिकारिक संकट से इनकार किया है। धर्मशालाओं, मिड-डे मील और अन्न क्षेत्रों में पर्याप्त गैस उपलब्ध है. मांग के अनुसार शत-प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. लगातार मॉनिटरिंग और आपूर्ति व्यवस्था पर नजर है. 

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