मधुबनी : पहली बार विधायक बने माधव आनंद बड़बोले, होमवर्क के बिना बेतुके बयान दे रहे : समीर महासेठ - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 26 मार्च 2026

मधुबनी : पहली बार विधायक बने माधव आनंद बड़बोले, होमवर्क के बिना बेतुके बयान दे रहे : समीर महासेठ

Sameer-mahaseth
मधुबनी (रजनीश के झा)। पूर्व उद्योग मंत्री व पूर्व नगर विधायक समीर कुमार महासेठ ने कहा कि पहली बार विधायक बने माधव आनंद को किसी भी विषय पर बोलने से पहले उसपर.थोड़ा होमवर्क कर लेना चाहिए, नहीं तो हंसी के पात्र बन जाएंगे और उनके द्वारा दिया गया बयान उन्हीं के लिए घातक साबित हो सकता है। वर्तमान नगर विधायक द्वारा लोहट चीनी मिल की जमीन को लेकर दिए गए बयान पर पूछे गए सवाल पर पूर्व उद्योग मंत्री व पूर्व नगर विधायक समीर कुमार महासेठ ने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार में शाहनवाज हुसैन के उद्योग मंत्री कार्यकाल के दौरान साल 2021-2022 में बंद चीनी मिलों की जमीन को औद्योगिक विकास के लिए गन्ना विभाग से उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया था। यह पहल औद्योगिक क्लस्टर और इकाइयां स्थापित करने के लिए सरकारी भूमि के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। चीनी मिलों की पुरानी, बेकार पड़ी जमीन को बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण बियाडा को हस्तांतरित किया गया, ताकि वहां नए उद्योग लग सकें। विभिन्न जिलों में बंद मिलों की जमीन को चिन्हित कर,उद्योग विभाग को सौंपा गया,जो शाहनवाज हुसैन के कार्यकाल का एक प्रमुख हिस्सा था।


उन्होंने कहा कि 17 अगस्त 2022 को बिहार के उद्योग मंत्री बने थे। उनका कार्यकाल जनवरी 2024 तक रहा है। एनडीए सरकार के कार्यकाल में बंद चीनी मिल.के एक-एक उपकरण बेचे जा चुके हैं। साल 2022 में मिल के मशीनें व स्क्रैप बेच दिया गया। इसे कोलकाता की कंपनी बीबीएस इंफ्राकान प्राइवेट लिमिटेड ने खरीदा था। मिल के लिए बिछी रेल लाइन की 23 पटरियां काटकर चुरा ली गईं। इसे लेकर प्राथमिकी हुई। बाद में रेल पटरियां बरामद हुई थीं। इससे पूर्व 2017 में मिल के अंदर रखे रेल इंजन को रेलवे यहां से ले गया था। जिसे फिलहाल दरभंगा स्टेशन के सामने सजाकर रखा गया है। उन्होने कहा कि साल 1914 में 225 एकड़ भूमि में दरभंगा राज की दरभंगा शुगर कंपनी की स्थापना की गई थी। लोहट,चीनी मिल का 150 एकड़ में कृषि फार्म और 75 एकड़ में कारखाना तथा पदाधिकारियों व कर्मियों के लिए आवास का निर्माण किया गया था। ढुलाई के लिए पंडौल स्टेशन से लेकर लोहट चीनी मिल के अंदर तक रेलवे लाइन बिछाई गई थी।.साल 1974 में बिहार स्टेट शुगर कारपोरेशन लिमिटेड की स्थापना की गई। घाटा बढ़ने से 1996 में लोहट चीनी मिल बंद कर दी गई।

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