- गरबा की रंगत में झूमते नन्हे कदम और तालियों से गूंजता पंडाल, कलकलीबहरा विद्यालय का वार्षिकोत्सव बना यादगार
- वार्षिकोत्सव व शारदा संगोष्ठी में शिक्षा, संस्कृति और अभिभावकों की सहभागिता का दिखा अद्भुत संगम
‘निपुण’ उपलब्धि : मेहनत का उजला परिणाम
कार्यक्रम का सबसे गौरवपूर्ण क्षण वह रहा जब विद्यालय को वर्ष 2025-26 के निपुण आकलन में 88 प्रतिशत अंक प्राप्त कर ‘निपुण विद्यालय’ घोषित किए जाने की उपलब्धि साझा की गई। यह केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि शिक्षकों की मेहनत, बच्चों की लगन और अभिभावकों के विश्वास का साकार रूप है। इस उपलब्धि पर बच्चों और अभिभावकों को सम्मानित किया गया, जिससे पूरे माहौल में गर्व और आत्मविश्वास की नई ऊर्जा संचारित हुई। मतलब साफ है निपुण विद्यालय’ का दर्जा मिलना इस स्कूल के लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। डीएलएड प्रशिक्षुओं के मूल्यांकन में 88þ अंक प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि संकल्प मजबूत हो, तो उत्कृष्टता हासिल की जा सकती है।संस्कृति के रंगों में सजी प्रस्तुति
कार्यक्रम में बच्चों की प्रस्तुतियां केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संदेश और परंपरा का जीवंत चित्रण थीं। सरस्वती वंदना से शुरुआत हुई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक स्पर्श दिया। स्वागत गीत, समूह नृत्य और इको क्लब द्वारा प्रस्तुत पर्यावरण संरक्षण आधारित कार्यक्रमों ने संदेश और मनोरंजन का संतुलन बनाया। खास यह रहा कि हर प्रस्तुति में अनुशासन और समर्पण झलक रहा था। इको क्लब के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती प्रस्तुतियां आज के समय की आवश्यकता को रेखांकित कर रही थीं। वहीं उत्तर प्रदेश की विविधता को दर्शाता लोकनृत्य और नवरात्रि के अवसर पर बालिकाओं द्वारा प्रस्तुत ‘गरबा’ ने कार्यक्रम को न सिर्फ सांस्कृतिक ऊंचाई प्रदान की, बल्कि दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अभिभावकों की भागीदारी : शिक्षा का मजबूत आधार
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही अभिभावकों की सक्रिय और शत-प्रतिशत सहभागिता। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि अब ग्रामीण समाज में शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की साझा प्रतिबद्धता बनती जा रही है। यह बदलते सामाजिक दृष्टिकोण का संकेत है, जहां अब शिक्षा को लेकर परिवारों में गंभीरता और जुड़ाव दोनों बढ़े हैं।
सम्मान और प्रेरणा का मंच
कार्यक्रम में कक्षा-5 की छात्रा सृष्टि कुमारी को ‘बेस्ट स्टूडेंट अवार्ड’ तथा श्रीमती रीमा देवी को ‘उत्कृष्ट अभिभावक पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही कक्षा-5 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को भावभीनी विदाई दी गई, जिसमें खुशी और भावुकता का अनूठा संगम देखने को मिला, जो उनके जीवन के नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बना। समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए विनीता मसीह तथा सेवानिवृत्त शिक्षामित्र लक्ष्मीपुरी सिंह का सम्मान कार्यक्रम को भावनात्मक ऊंचाई दे गया।
शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर संदेश
मुख्य अतिथि डॉ. प्रियंका जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा ही बच्चों के भविष्य की असली पूंजी है। शिक्षा ही वह शक्ति है, जो बच्चों को आत्मनिर्भर और समाज को सशक्त बनाती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा यह आयोजन केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि उस दिशा का संकेत है, जहां गांवों के विद्यालय भी उत्कृष्टता की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं। वहीं डॉ. रितिका श्रीवास्तव ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि विद्यालयों की ऐसी पहलें ही आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत करती हैं। इस दौरान उन्होंने अभिभावकों से निरंतर सहयोग की अपील की।
आभार और संकल्प
कार्यक्रम के अंत में प्रा.वि. कलकली बहरा की प्रधानाध्यापिका वर्षा रानी जायसवाल, सहायक अध्यापक अविनाश कुमार गुप्ता और सरिता मैडम ने सभी अतिथियों, अभिभावकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। संचालन भी प्रधानाध्यापिका द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया, जिसने पूरे आयोजन को एक सूत्र में बांधे रखा।
‘निपुण विद्यालय’ बनने का सफर
‘निपुण’ बना प्रा.वि. कलकलीबहरा विद्यालय
88 % अंक के साथ हासिल की उपलब्धि
पूरे जिले में मिला प्रशस्ति पत्र
बच्चों और अभिभावकों का सम्मान
शिक्षा में सामूहिक भागीदारी का मॉडल
डीएलएड प्रशिक्षुओं के आकलन में उत्कृष्ट प्रदर्शन
शिक्षकों की सतत मेहनत और नवाचार का परिणाम
अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी बनी सफलता की कुंजी
ग्रामीण शिक्षा का बदलता चेहरा
प्रा.वि. कलकलीबहरा का यह आयोजन बताता है कि यदि विद्यालय, शिक्षक और अभिभावक एक साथ खड़े हों, तो संसाधनों की कमी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। ‘निपुण विद्यालय’ केवल एक टैग नहीं, बल्कि उस विश्वास का प्रतीक है, जो आने वाले भारत की नींव तैयार कर रहा है।



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