- क्षेत्र में हर बिजली कार्यालय पर विरोध सभा, कर्मचारियों ने बिल को किसान-उपभोक्ता विरोधी बताया
संघर्ष समिति के नेताओं ने बताया कि यह प्रदर्शन नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर आयोजित किया गया है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित बिल का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निजीकरण को बढ़ावा देना और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करना है। वक्ताओं के अनुसार, बिल में प्रस्तावित प्रावधानों के तहत पांच वर्षों में क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करने से कृषि उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का भारी बोझ पड़ेगा। वर्तमान में सिंचाई के लिए रियायती दरों पर बिजली पाने वाले किसानों को अधिक शुल्क देना पड़ सकता है, जिससे खेती की लागत बढ़ेगी और ग्रामीण संकट गहरा सकता है। साथ ही निजी वितरण कंपनियां ग्रामीण और कम राजस्व वाले क्षेत्रों में सेवा देने से बच सकती हैं, जिससे गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। संघर्ष समिति ने कहा कि एक ही क्षेत्र में एकाधिक वितरण लाइसेंस देने की व्यवस्था से निजी कंपनियां केवल अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को चुनेंगी, जबकि घाटे वाले उपभोक्ता सार्वजनिक वितरण कंपनियों के पास रह जाएंगे। इससे घरेलू उपभोक्ताओं, विशेषकर कम आय वाले परिवारों के लिए बिजली दरों में भारी वृद्धि हो सकती है और बिजली सेवा एक सामाजिक सेवा के बजाय मुनाफे पर आधारित व्यापार बन जाएगी।
कर्मचारी नेताओं ने आशंका जताई कि बिल से बिजली क्षेत्र में पिछले दरवाजे से निजीकरण का रास्ता खुलेगा, जिससे हजारों कर्मचारियों और इंजीनियरों की नौकरी तथा सेवा शर्तों पर खतरा पैदा होगा। उन्होंने कहा कि निजीकरण के पिछले अनुभव बताते हैं कि इससे कर्मचारियों की संख्या में कटौती, ठेका प्रथा में वृद्धि और सेवा शर्तों में गिरावट आती है। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि यह बिल देश की संघीय व्यवस्था को भी प्रभावित करता है। बिजली समवर्ती सूची का विषय होने के बावजूद प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से केंद्र सरकार के अधिकारों में अत्यधिक वृद्धि की जा रही है, जिससे राज्यों की स्वायत्तता और स्थानीय जरूरतों के अनुसार बिजली नीति तय करने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। समिति ने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपील की कि वे संसद में इस बिल के संभावित प्रभावों पर गंभीरता से विचार करें और किसानों, उपभोक्ताओं तथा बिजली कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए इसका विरोध करें। विरोध सभा को राजेंद्र सिंह, ई. एस.के. सिंह, ई. मनोज गुप्ता, अंकुर पांडेय, कृष्णा सिंह, प्रवीन कुमार, अनुराग सिंह, उदयभान दुबे, अरुण कुमार, रमेश सिंह, पंकज यादव, अमित कुमार, धर्मेंद्र यादव, एस.के. भूषण, कृपाल सिंह, रोहित कुमार और विनोद कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया।

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