प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. सुरेन्द्र कुमार अहिरवाल ने बताया कि इस प्रशिक्षण में किसानों को मत्स्य पालन के साथ अन्य कृषि कार्यों को जोड़ने की जानकारी दी जाएगी। इससे वे अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर पाएंगे। इस अवसर पर पाठ्यक्रम सह-निदेशक डॉ. बिश्वजीत देबनाथ, डॉ. तारकेश्वर कुमार, डॉ. विवेकानंद भारती एवं डॉ. राकेश कुमार सहित अन्य तकनीकी अधिकारीगण भी उपस्थित रहे । कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों, तालाब प्रबंधन, बीज उत्पादन, आहार प्रबंधन तथा समेकित कृषि प्रणाली के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं क्षेत्र भ्रमण का भी आयोजन किया जाएगा, ताकि किसान इन तकनीकों को अपने खेतों में सफलतापूर्वक अपना सकें। यह कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है।
पटना (रजनीश के झा)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में दिनांक 20 मार्च, 2026 को मत्स्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित “ग्रामीण आजीविका सुधार हेतु समेकित मत्स्य पालन की तकनीकियाँ” विषय पर चार दिवसीय (20-23 मार्च, 2026) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में अररिया जिले के कुल 31 किसान भाग ले रहे हैं, जिन्हें समेकित मत्स्य पालन की उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, ताकि उनकी आय एवं आजीविका के स्तर में वृद्धि हो सके। डॉ. कमल शर्मा, प्रभागाध्यक्ष, पशुधन एवं मात्स्यिकी प्रबंधन ने कहा कि समेकित मत्स्य पालन तकनीक किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम है, जिससे कम संसाधनों में अधिक उत्पादन संभव है। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आजीविका को सुदृढ़ एवं स्थायी बना सकते हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सहायक निदेशक (मत्स्य) डॉ. टुन टुन सिंह, मत्स्य बीज फार्म, सोनारू, मत्स्य अनुसंधान केंद्र, मीठापुर, पटना ने किसानों को मखाना-सह-मत्स्य पालन की उन्नत तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस समेकित प्रणाली को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन एवं बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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