पटना : भाकपा-माले ने मनाया 58वां स्थापना दिवस, संघर्ष तेज करने का आह्वान - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

बुधवार, 22 अप्रैल 2026

पटना : भाकपा-माले ने मनाया 58वां स्थापना दिवस, संघर्ष तेज करने का आह्वान

Cpi-ml-bihar
पटना (रजनीश के झा), 22 अप्रैल । भाकपा-माले ने आज अपने 58वें स्थापना दिवस को पूरे बिहार सहित देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ मनाया। यह अवसर विश्व सर्वहारा के महान नेता व्लादिमीर लेनिन के जन्मदिवस के साथ भी जुड़ा हुआ है। पटना स्थित राज्य कार्यालय में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में पार्टी के राज्य सचिव कॉमरेड कुणाल ने झंडोत्तोलन किया और केंद्रीय कमिटी द्वारा जारी 22 अप्रैल के आह्वान का पाठ किया गया। इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता कॉमरेड केडी यादव, कॉमरेड एसके शर्मा, कॉमरेड मंजू प्रकाश, कॉमरेड संतलाल, आइसा के प्रतिनिधि प्रसेनजीत कुमार, प्रो. शोभन चक्रवर्ती, प्रो. सतीश कुमार, प्रकाश कुमार, अभय पांडेय, पाल बिहारी लाल, संजय यादव, विनय कुमार, प्रीति पटेल, सबा आफरीन, प्रिया गुप्ता सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित थे।


अपने संबोधन में राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि पार्टी का यह स्थापना दिवस वैश्विक उथल-पुथल और गंभीर आर्थिक चुनौतियों के दौर में मनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार की विदेश नीति के कारण भारत को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है, जिसका असर मजदूरों, प्रवासी कामगारों और आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई, ईंधन और खाद संकट, तथा श्रम नीतियों में बदलाव के खिलाफ व्यापक असंतोष उभर रहा है। मजदूर वर्ग नई श्रम संहिताओं के खिलाफ आवाज उठा रहा है, जबकि किसान समुदाय संभावित व्यापारिक समझौतों के खिलाफ संघर्ष की तैयारी में है। कुणाल ने मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर करने और शिक्षा क्षेत्र में बदलावों पर भी चिंता व्यक्त की, तथा सामाजिक न्याय के मुद्दों को फिर से केंद्र में लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि आने वाला समय सामाजिक आंदोलनों के लिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि 1927 के महाड़ सत्याग्रह और मनुस्मृति दहन की 100वीं वर्षगांठ तथा समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की जयंती का विशेष महत्व है। पार्टी ने इस अवसर पर देश को सही मायनों में संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए संघर्ष तेज करने का आह्वान किया। साथ ही, महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करने और इस मुद्दे पर “भ्रामक प्रचार” बंद करने की मांग की गई। कार्यक्रम के अंत में पार्टी कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत करने और जनता के मुद्दों पर संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया। पटना महानगर के विभिन्न क्षेत्रों—दीघा, आशियाना, गोविंदपुर, न्यू मार्केट और पटना जंक्शन—में भी स्थापना दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।

कोई टिप्पणी नहीं: