- ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा का फैसला, छोटे उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ, भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति के निर्देश
1 किलोवाट उपभोक्ताओं को सबसे बड़ी राहत
ऊर्जा मंत्री के निर्देश के अनुसार, 1 किलोवाट तक के कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन 30 दिनों तक नहीं काटा जाएगा, भले ही उनका बैलेंस पूरी तरह नेगेटिव क्यों न हो। स्पष्ट किया गया है कि पूरा बिलिंग चक्र (एक माह) पूरा होने से पहले किसी भी परिस्थिति में कनेक्शन विच्छेद नहीं किया जाएगा। यह निर्णय उपभोक्ताओं को आर्थिक दबाव से उबारने के उद्देश्य से लिया गया है।
2 किलोवाट उपभोक्ताओं को भी राहत
सरकार ने 2 किलोवाट कनेक्शन धारकों को भी राहत देते हुए कहा है कि 200 तक का माइनस बैलेंस होने पर कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। यह प्रावधान भी छोटे और निम्न आय वर्ग के उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर लागू किया गया है।
कनेक्शन काटने से पहले 5 अनिवार्य एसएमएस
उपभोक्ता हितों को सर्वोपरि रखते हुए सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्था लागू की है- बिजली कनेक्शन काटने से पहले 5 चरणों में एसएमएस अलर्ट भेजे जाएंगे ताकि उपभोक्ताओं को समय रहते भुगतान का मौका मिल सके. इससे अचानक बिजली कटौती जैसी समस्याओं पर भी रोक लगेगी।
भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति के निर्देश
प्रदेश में बढ़ते तापमान को देखते हुए मंत्री ए.के. शर्मा ने सभी जिलों के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अनुरक्षण कार्यों में तेजी लाई जाए. कहीं भी बिजली आपूर्ति बाधित न हो. फॉल्ट सुधार और ट्रांसफॉर्मर क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए.
इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा सुधार
ऊर्जा विभाग के अनुसार अब तक करीब 30 लाख नए बिजली खंभे लगाए जा चुके हैं. ट्रांसफार्मरों की क्षमता में भी व्यापक वृद्धि की गई है. इन प्रयासों से प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हुई है।
देश में अग्रणी बना उत्तर प्रदेश
ऊर्जा मंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश अब देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति करने वाला राज्य बनकर उभरा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि भीषण गर्मी में भी प्रदेशवासियों को बिजली संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
सरकार का संदेश : उपभोक्ता हित सर्वोपरि
यह फैसला स्पष्ट संकेत देता है कि सरकार आम जनता की जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है। खासकर गर्मी के मौसम में यह राहत लाखों परिवारों के लिए बड़ी सहूलियत साबित होगी। बढ़ती गर्मी और बिजली की बढ़ती मांग के बीच सरकार का यह निर्णय न सिर्फ राहत देने वाला है, बल्कि उपभोक्ता हितों के प्रति संवेदनशील शासन का भी प्रमाण है। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है।

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