पटना (रजनीश के झा), 30 अप्रैल। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर के सहयोग से 30 अप्रैल, 2026 को भोजपुर जिले के कोशिहान गाँव में “उर्वरकों का संतुलित उपयोग” विषय पर प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के डॉ. कमल शर्मा, प्रमुख, पशुधन एवं मात्स्यिकी प्रबंधन प्रभाग; डॉ. नारायण भक्त, प्रधान वैज्ञानिक; डॉ. सौरभ कुमार, वैज्ञानिक तथा कृषि विज्ञान केंद्र, भोजपुर के विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ. सच्चिदानंद ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। उन्होंने किसानों के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझा और उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने किसानों को जैव उर्वरकों, हरी खाद तथा वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग के महत्व एवं उनकी विधियों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। साथ ही, रासायनिक उर्वरकों के संतुलित एवं आवश्यकता-आधारित प्रयोग पर विशेष बल दिया गया। किसानों को बताया गया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग करने से न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी दीर्घकाल तक बनी रहती है। कार्यक्रम के दौरान “सही प्रकार, सही मात्रा एवं सही समय” पर उर्वरक उपयोग की अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझाया गया। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने से उत्पादन लागत में कमी आती है तथा पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। इस अवसर पर 40 से अधिक किसान उपस्थित रहे। किसानों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए अपनी समस्याएँ साझा कीं और विशेषज्ञों से उपयोगी सुझाव प्राप्त किए। यह कार्यक्रम किसानों के बीच उर्वरकों के वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अत्यंत सहायक सिद्ध हुआ।
गुरुवार, 30 अप्रैल 2026
पटना : उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
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