दरअसल आज ट्रंप पेपर टाइगर की भूमिका में होते हुए समूचे दुनिया को तनाव के दौर में धकेल दिया है। मजे की बात यह है कि करीब सवा साल के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और दुनिया के देशों में अपनी स्वीकार्यता के सबसे नीचले पायदान पर पहुंच चुके हैं। ईरान से टकराव के बाद केवल एक माह में ही स्वीकार्यता में दस प्रतिशत की गिरावट स्वयं सोचने को मजबूर कर देना चाहिए। इसी माह अप्रेल की ताजा रिपोर्टस की बात की जाए तो न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार 39 प्रतिशत, रॉयटर के अनुसार 36 प्रतिशत और एपी के अनुसार 33 प्रतिशत वैश्विक स्वीकार्यता रह गई है। यदि अमेरिका की ही बात करें तो आर्थिक नीतियों के चलते असन्तोष मुखर होता जा रहा है। अधिकांश अमेरिकी ईरान संघर्ष को लेकर भी ट्रंप की निर्णय से संतुष्ट नहीं है। दरअसल ट्रंप की नीतियां अमेरिका सहित दुनिया के देशों में अस्थिरता और तनाव पैदा करने वाली है।
ईरान को तबाह करने की घोषणा और ईरान के विद्युत और ऑयल संयत्रों को नष्ट करने की धमकी और उसके बाद हार्मुज जलडमरुमध्य को लेकर धमकी और फिर सीज फायर की बात करना और ईरान द्वारा समझौते की टेबल पर सकारात्मकता नहीं होने की स्थिति में अमेरिका की लगातार हेटी हो रही है। वैसे देखा जाए तो रुस यूक्रेन युद्ध को हवा देने और फिर जेलेंस्की को धमकाने व जेलेंस्की की अमेरिका में ही ठेगा दिखाना अमेरिका के लिए कम शर्मनाक हालात नहीं रहे हैं। नाटों से हटने की धमकी, वेनेजुएला पर आक्रमण और वहां के राष्ट्राध्यक्ष के साथ व्यवहार, चीन के साथ व्यापार युद्ध, भारत को बार बार टैरिफ गीदड़ भभकी, कनाड़ा का अमेरिका का राज्य घोषित करने, ग्रीनलैण्ड हथियाने का प्रयास, गाजा पट्टी, क्यूबा आदि से संबंधित सभी भभकियां भभकियां ही साबित हुई है और इससे कहीं ना कहीं अमेरिका और ट्रंप की विश्वसनीयता में कमी ही आई है।
अब तो सवाल यह उठने लगा है कि पलटू राम की गीदड़ भभकियों का कुछ असर भी रहेगा या नहीं। क्योंकि आज के जमाने में छोटे से छोटे देष को भी हल्के में नहीं लिया ज सकता है। यह भी सही है कि आज यदि जंग छेड़ते हैं तो दो चार दिन में फैसला हो जाएगा यह सोचना ही गलत होगा। इसका ताजातरीन उदाहरण रुस यूक्रेन तो है ही अब ताजा उदाहरण अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष को देखा जा सकता है। इसलिए पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिन्दुर या सर्जीकल स्ट्राइक जैसी प्रतिक्रिया ही सबक सिखाने में सफल हो सकती है। लंबी जंग लड़ने की स्थिति में दुनिया का कोई देश नहीं है। आज अमेरिका ईरान संघर्ष में ईरान से अधिक हानि अमेरिका को ही उठानी पड़ रही है और ट्रंप ऐन केन प्रकारेण जंग को रुकवाने व सीज फायर के प्रयास कर रहे हैं। पर ट्रंप को यह सोच लेना चाहिए कि डर या धमकियां से नतीजा नहीं निकलने वाला है। दूसरा ट्रंप के ट्रेक रिकार्ड को देखते हुए उनकी कही बात पर लंबे समय तक विश्वास भी नहीं किया जा सकता। इसलिए ट्रंप को पहले विश्वसनीयता बनाने के ठोस प्रयास करने होंगे। दुनिया के देशों को विश्वास में लेना होगा। नहीं तो दुनिया के हालात दिन प्रतिदिन गंभीर चिंताजनक ही होने हैं और इसके लिए ट्रंप को इतिहास माफ करने वाला नहीं होगा।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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