मधुबनी : प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधन विशेषाधिकार का दुरुपयोग : मनोज झा - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

मधुबनी : प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधन विशेषाधिकार का दुरुपयोग : मनोज झा

  • राष्ट्र के नाम संदेश के नाम पर चुनावी भाषण सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग।

Manoj-jha-bihar
मधुबनी (रजनीश के झा)। मिथिला लोकतांत्रिक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज झा ने प्रधानमंत्री मोदी जी के हालिया राष्ट्र के नाम संबोधन को विशेषाधिकार का दुरुपयोग बताया है। उन्होंने कहा है कि यह राष्ट्र के नाम संबोधन नहीं, सरकारी खर्च पर चुनावी भाषण था। प्रधानमंत्री होने के नाते नरेंद्र मोदी जी को यह अधिकार तो है कि वे जब चाहें राष्ट्र को संबोधित कर लें। लेकिन यह राष्ट्र से जुड़े किसी संकट, किसी समस्या या किसी उपलब्धि पर ही होता आया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि एक प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन के नाम पर विपक्षी दलों को कोसने के लिए इस विशेषाधिकार का दुरुपयोग किया है। जब टेलिप्राम्टर लगाकर विपक्ष को ही कोसना था तो इसे राष्ट्र के नाम संदेश का नाम नहीं दिया जाना चाहिए था। इसे गंभीर समस्या बताते हुए मनोज झा ने कहा है कि अगर इसे वे 'राष्ट्र के नाम संदेश' का नाम नहीं देते तो सरकारी खर्च पर इतना बड़ा चुनावी भाषण नहीं कर पाते। विपक्षी दलों को कोसने के नाम पर मोदी जी ने राष्ट्र को संबोधित करना जरूरी समझा भी तो थोड़ा तथ्यपरक बातें करनी चाहिए थी। यह तो झूठ का पुलिंदा और बेसिर पैर की बातें थीं। यह अनर्गल प्रलाप था जिसमें एक ही वाक्य का दर्जनों बार दोहराव था। मनोज झा ने कहा है जिस महिला विधेयक के गिर जाने से मोदी जी सदमें में हैं और देश को गुमराह कर रहे हैं। दरअसल उनकी मंशा महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं थी, अगले चुनाव में भाजपा के लिए बिसात बिछाने की थी। महिलाओं को संसदीय चुनाव में आरक्षण देने का विधेयक तो दरअसल 20 सितंबर 2023 को ही पारित हो चुका है और 29 सितम्बर 2023 को महामहिम राष्ट्रपति इसे मंजूरी भी दे चुकी हैं। फिर न देश का संविधान यह कहता है न संसदीय नियम क़ायदे कि किसी पारित विधेयक को फिर से पारित करना आपकी मंशा महिलाओं को अधिकार देने की नहीं है। महिलाओं को बरगलाने और बहलाने की है और देश की महिलाएं इस बात को बखूबी समझती हैं कि आपका मिशन मात्र चुनावी होता है।

कोई टिप्पणी नहीं: