सीहोर : श्रीराम कथा में आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

सीहोर : श्रीराम कथा में आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव

  • यज्ञ भारतीय संस्कृति का एक पवित्र अनुष्ठान : यज्ञ संचालक पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे

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सीहोर। यज्ञ भारतीय संस्कृति का एक पवित्र अनुष्ठान है, जो न केवल देवताओं को प्रसन्न कर मनोकामनाएं पूर्ण करता है, बल्कि विश्व कल्याण और पर्यावरण शुद्धि का भी माध्यम है। यह अग्नि में आहुति के माध्यम से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उक्त विचार शहर के बस स्टैंड के समीप जयंती कालोनी में जारी भव्य श्री 21 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ के दौरान यज्ञ संचालक पंडित दुर्गाप्रसाद कटारे ने कहे। इस मौके पर उन्होंने कहाकि श्री हनुमान मंदिर समिति के तत्वाधान में जारी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के कारण क्षेत्र पूरी तरह धर्ममय हो गया है। यहां पर सुबह विप्रजनों के अलावा यजमानों के लिए प्रसादी का वितरण किया जा रहा है और वहीं रात्रि को बस स्टैंड क्षेत्र पर नगर भोज का आयोजन निरंतर चल रहा है। नगर भोज में सनातन धर्म के सभी बंधु एक साथ बैठक भोजन प्रसादी ग्रहण कर रहे है। महोत्सव का आयोजन सुबह आठ बजे से यज्ञ शाला में विप्रजनों के मार्गदर्शन में वैदिक परम्परा के साथ किया जाता है और उसके पश्चात दोपहर में कथा व्यास राष्ट्रीय राम कथा व्यास मानस कोकिला महंत डॉ. प्रज्ञा भारती के द्वारा जयंती कालोनी के परिसर में श्रीराम कथा का वाचन किया जाता है, इसके पश्चात रात्रि नौ बजे से रामलीला का मंचन किया जा रहा है। गुरुवार को महोत्सव में आए संतों, कथा वाचकों और मंहत का यज्ञ संचालक पंडित श्री कटारे बाबा, समिति के अध्यक्ष रुद्र प्रकाश राठौर, यज्ञ संचालक पंडित दीपक शास्त्री, मंदिर के पंडित अनिल शर्मा आदि ने स्वागत किया। इस मौके पर प्रदेश के प्रसिद्ध बोलाई हनुमान मंदिर के महंत का स्वागत भी किया गया।


श्रीराम कथा मनुष्य को मर्यादा में रहना सिखाती

कथा में महंत डॉ. प्रज्ञा भारती ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का वर्णन किया और कहाकि श्रीराम कथा मनुष्य को मर्यादा में रहना सिखाती है। यह जीवन का सही मार्गदर्शन करती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से राम कथा सुनता है, उसका लोक और परलोक दोनों सुधर जाते हैं।  राजा दशरथ को संतान नहीं थी। वे कुलगुरु वशिष्ठ के पास गए। वशिष्ठ ने श्रृंगी ऋषि से पुत्र कामेष्टि यज्ञ करवाया। यज्ञ कुंड से प्रकट हुए अग्नि देवता ने राजा दशरथ को खीर दी। राजा ने यह खीर अपनी तीनों रानियों को दी। इसी खीर के सेवन से चारों भाइयों राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ। भगवान का जन्म असुरों और पापियों का नाश करने के लिए हुआ था। राम ने बचपन से ही असुरों का संहार किया। मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जीवन चरित्र सदियों तक प्रेरणा देता रहेगा। माता-पिता और भाइयों के प्रति उनका प्रेम अमर है।

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