विचार : नो किंग्स प्रदर्शनों से लेकर ट्रम्प आलवेज चिकन आउट - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 11 अप्रैल 2026

विचार : नो किंग्स प्रदर्शनों से लेकर ट्रम्प आलवेज चिकन आउट

Dr-rajendra-sharma
मई 2025 में एक समाचार पत्र (फाइनेंसियल टाइम्स) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बदलते बयानों को लेकर टिप्पणी करते हुए यह कहा कि ट्रम्प आलवेज चिकन आउट तो लग रहा था कि यह ट्रम्प के प्रति अतिवादी प्रतिक्रिया है पर पिछले एक साल की डोनाल्ड ट्रम्प की टिप्पणियों, निर्णयों, गैरजिम्मेदारी पूर्ण व्यक्तव्यों और उनसे पलटने में भी देरी नहीं करने ने यह सिद्ध कर दिया है कि उस समय जो टिप्पणी की वह अपने आप में सटीक टिप्पणी ही रही है। आज ट्रम्प द्वारा ईरान से युद्ध का परिणाम यह हो गया है कि प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से दुनिया के लगभग सभी देश इससे प्रभावित हो रहे हैं। आज यह समझ लेना चाहिए कि कोई भी देश चाहे वह बड़ा से बड़ा और अति शक्तिशाली देश ही क्यों न हो किसी छोटे से छोटे देश को दो चार दिन में पराजित करने का सपना पालता है तो यह सपना पूरा होने वाला नहीं है। रुस यूक्रेन युद्ध इसका बड़ा उदाहरण है जो चार साल होने पर भी किसी निर्णायक स्तर पर नहीं पंहुचा है। अमेरिका-इजरायल ने जब ईरान पर आक्रमण किया था तब यह सपने में भी नहीं सोचा था कि युद्ध लंबा और आत्मघाती सिद्ध होगा। ट्रम्प की ईरान की ताजा धमकी  24 घंटे में ईरान को मिटाने और फिर रातों-रात सीजफायर की बात सामने हैं। एक बात और यह कि ट्रम्प की फितरत को जानने वालों को यह सीजफायर कितना चलेगा या सिरे चढ़ेगा भी या नहीं, विश्वास नहीं हो रहा। हालात साफ हो रहे हैं कि सीजफायर की बात होने के बाद भी अमेरिका का ही साथी इजरायल लेबनान पर आक्रमण को तेज कर दिया है और जनहानि के साथ ही तनाव के हालात अधिक बन रहे हैं। ट्रम्प के आलवेज चिकन आउट का ताजातरीन उदाहरण तो अब नया वक्तव्य कि स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से गुजरने वाले वाहनों से टोल की वसूली अमेरिका और ईरान दोनों मिलकर करेंगे। कल तक यही ट्रम्प हार्मुज से यातायात बहाल करने पर जोर दे रहे थे और आज टोल वसूली की बात करने लगे हैं।


दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआत से ही अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह से खो चुके हैं। यहां तक कि आज ट्रम्प को लोग दुनिया के देशों को आर्थिक संकट में ड़ालने वाला मानने के साथ ही विश्वयुद्ध हो या नहीं पर लगभग वैसे ही हालात बनाने वाला माना जाने लगा है। देखा जाए तो ट्रम्प के तुगलकी निर्णय अमेरिका को भी संकट में ही डाल रहे हैं और वहां के हालात किसी भी स्थिति में सामान्य नहीं माने जा सकते। ट्रम्प की लोकप्रियता में लगातार कमी और उनके खिलाफ नो किंग्स जैसे आंदोलन और प्रदर्शन इसके उदाहरण है। अमेरिका सहित 12 देशों में ट्रम्प के खिलाफ लाखों की संख्या में लोगों ने नो किंग्स अभियान के तहत प्रदर्शन किये हैं। ट्रम्प का विरोध उनके अपनों के बीच भी होने लगा है और उनकी वैश्विक और स्थाानीय लोकप्रियता का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। ट्रम्प 2 कार्यकाल के शुरुआत से ही अविवेकपूर्ण और तानाशाही पूर्ण निर्णयों के कारण दुनिया के देशों में विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्रम्प का व्यवहार अनप्रेेडिक्टेबल हो गया है। कुछ कहते हैं और उससे पीछे हटने में भी देराी नहीं लगाते। एक जिम्मेदार नेता तो ट्रम्प को माना ही नहीं जा सकता।


ट्रम्प के कोई से भी निर्णय चाहे वह हालिया दिनों में नाटो से हटने की धमकी हो या, ग्रीन लैण्ड के अधिग्रहण, वेनेजुएला प्रकरण हो या कनाडा को अमेरिका का राज्य बताना, चीन-भारत सहित दुनिया के देशों के साथ टैरिफ वार करने, वीजा व्यवस्था, सैनिक कार्रवाई की धमकियां देने और इसके परिणाम सबके सामने है। ईरान को एक ही रात में खत्म करने की धमकी और फिर सीज फायर की बात करना कहीं ना कहीं ट्रम्प को गैरजिम्मेदार और दुनिया को बेवजह संकट  में ड़ालने वाला माना जाने लगा है। मजे की बात यह है कि इन पलटूराम के निर्णयों से बिना किसी कारण दुनिया तनाव के दौर में आ गई है।


एक बात साफ हो गई है कि ट्रम्प के इन निर्णयों से अमेरिका की बादशाहत खतरें में आ गई है। जहां कल तक अमेरिका दुनिया के देशों को अपनी हथेली में नचाया करता था, उसकी हैसियत बुरी तरह से प्रभावित हुई है। ट्रम्प में वैश्विक नेतृत्व करने की क्षमता तो लगभग नहीं ही लगती। दूसरी और यह भ्रम भी टूटता जा रहा है कि ड़रा-धमका कर कुछ भी करवाने की क्षमता भी अमेरिका खो चुका है। एक बात यह भी साफ हो जानी चाहिए कि दुनिया के देश तो तनाव और आर्थिक व अन्य तरह से अस्थिरता के दौर में आये ही हैं पर इसका व्यापक असर अमेरिका के सामने भी आने लगा है। अमेरिका में जिस तरह से ट्रम्प के खिलाफ विद्रोह की चिनगारी फूटने लगी है इसके परिणाम गंभीर भी हो सकते हैं। अमेरिका के ही रिटायर्ड नेवी एडमिरल एसईएल विलियम मैक्रेवन की माने तो ‘‘ट्रम्प आपने अपने कामों से हमारे बच्चों की नजरों में हमें शर्मिंदा कर दिया है। दुनिया के मंच पर अमेरिका की जलालत हो रही है, एक राष्ट्र के तौर पर भी हमें बांटा जा रहा है।‘‘ यह तो एक प्रतिक्रिया या यों कहें कि अमेरिकावासियों में से एक आवाज है। हालात और प्रतिक्रियाएं इससे भी गंभीर है और इसे नो किंग्स के तहत हो रहे प्रदर्शनों में आसानी से देखा जा सकता है। यह साफ हो जाता है कि ट्रम्प के व्यवहार और निर्णयों ने अमेरिका की प्रतिष्ठा को भी अधिक प्रभावित किया है।








डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

स्तंभकार

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