दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआत से ही अपनी विश्वसनीयता पूरी तरह से खो चुके हैं। यहां तक कि आज ट्रम्प को लोग दुनिया के देशों को आर्थिक संकट में ड़ालने वाला मानने के साथ ही विश्वयुद्ध हो या नहीं पर लगभग वैसे ही हालात बनाने वाला माना जाने लगा है। देखा जाए तो ट्रम्प के तुगलकी निर्णय अमेरिका को भी संकट में ही डाल रहे हैं और वहां के हालात किसी भी स्थिति में सामान्य नहीं माने जा सकते। ट्रम्प की लोकप्रियता में लगातार कमी और उनके खिलाफ नो किंग्स जैसे आंदोलन और प्रदर्शन इसके उदाहरण है। अमेरिका सहित 12 देशों में ट्रम्प के खिलाफ लाखों की संख्या में लोगों ने नो किंग्स अभियान के तहत प्रदर्शन किये हैं। ट्रम्प का विरोध उनके अपनों के बीच भी होने लगा है और उनकी वैश्विक और स्थाानीय लोकप्रियता का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। ट्रम्प 2 कार्यकाल के शुरुआत से ही अविवेकपूर्ण और तानाशाही पूर्ण निर्णयों के कारण दुनिया के देशों में विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। ट्रम्प का व्यवहार अनप्रेेडिक्टेबल हो गया है। कुछ कहते हैं और उससे पीछे हटने में भी देराी नहीं लगाते। एक जिम्मेदार नेता तो ट्रम्प को माना ही नहीं जा सकता।
ट्रम्प के कोई से भी निर्णय चाहे वह हालिया दिनों में नाटो से हटने की धमकी हो या, ग्रीन लैण्ड के अधिग्रहण, वेनेजुएला प्रकरण हो या कनाडा को अमेरिका का राज्य बताना, चीन-भारत सहित दुनिया के देशों के साथ टैरिफ वार करने, वीजा व्यवस्था, सैनिक कार्रवाई की धमकियां देने और इसके परिणाम सबके सामने है। ईरान को एक ही रात में खत्म करने की धमकी और फिर सीज फायर की बात करना कहीं ना कहीं ट्रम्प को गैरजिम्मेदार और दुनिया को बेवजह संकट में ड़ालने वाला माना जाने लगा है। मजे की बात यह है कि इन पलटूराम के निर्णयों से बिना किसी कारण दुनिया तनाव के दौर में आ गई है।
एक बात साफ हो गई है कि ट्रम्प के इन निर्णयों से अमेरिका की बादशाहत खतरें में आ गई है। जहां कल तक अमेरिका दुनिया के देशों को अपनी हथेली में नचाया करता था, उसकी हैसियत बुरी तरह से प्रभावित हुई है। ट्रम्प में वैश्विक नेतृत्व करने की क्षमता तो लगभग नहीं ही लगती। दूसरी और यह भ्रम भी टूटता जा रहा है कि ड़रा-धमका कर कुछ भी करवाने की क्षमता भी अमेरिका खो चुका है। एक बात यह भी साफ हो जानी चाहिए कि दुनिया के देश तो तनाव और आर्थिक व अन्य तरह से अस्थिरता के दौर में आये ही हैं पर इसका व्यापक असर अमेरिका के सामने भी आने लगा है। अमेरिका में जिस तरह से ट्रम्प के खिलाफ विद्रोह की चिनगारी फूटने लगी है इसके परिणाम गंभीर भी हो सकते हैं। अमेरिका के ही रिटायर्ड नेवी एडमिरल एसईएल विलियम मैक्रेवन की माने तो ‘‘ट्रम्प आपने अपने कामों से हमारे बच्चों की नजरों में हमें शर्मिंदा कर दिया है। दुनिया के मंच पर अमेरिका की जलालत हो रही है, एक राष्ट्र के तौर पर भी हमें बांटा जा रहा है।‘‘ यह तो एक प्रतिक्रिया या यों कहें कि अमेरिकावासियों में से एक आवाज है। हालात और प्रतिक्रियाएं इससे भी गंभीर है और इसे नो किंग्स के तहत हो रहे प्रदर्शनों में आसानी से देखा जा सकता है। यह साफ हो जाता है कि ट्रम्प के व्यवहार और निर्णयों ने अमेरिका की प्रतिष्ठा को भी अधिक प्रभावित किया है।
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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