गाजियाबाद : देवप्रभा प्रकाशन का दिल्ली में पुस्तक लोकार्पण समारोह आयोजित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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बुधवार, 6 मई 2026

गाजियाबाद : देवप्रभा प्रकाशन का दिल्ली में पुस्तक लोकार्पण समारोह आयोजित

  • पुस्तक लोकार्पण समारोह में दिल्ली- एनसीआर के साहित्यकार हुए शामिल
  • कुसुम लता कुसुम की पुस्तक ‘मां’ लोकार्पित, 35 रचनाकारों ने किया मनोरम काव्य पाठ

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गाजियाबाद (संवाददाता)। देवप्रभा प्रकाशन ने लेखिका कुसुम लता पुंडोरा कुसुम की नवीनतम पुस्तक ‘भूमंडल की अनुपम रचना मां’ का लोकार्पण समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन निर्माण विहार स्थित एसएसएस स्टूडियो में अत्यंत गरिमामय वातावरण में किया। साहित्य, संवेदना और सृजनशीलता से सजे इस आयोजन में देश के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों एवं कवियों की स्नेहमयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा सुप्रसिद्ध कवयित्री कुसुम लता पुंडीर ‘कुसुम’ जी की पुस्तक भूमंडल की अनुपम रचना “माँ” का लोकार्पण। पुस्तक में नारी, ममता और संवेदनाओं के विविध रंगों को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया गया है। उपस्थित साहित्यकारों ने पुस्तक की विषयवस्तु, भाषा-शैली और भावभूमि की मुक्तकंठ से सराहना की। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं लेखिका डॉ. सविता चड्ढा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ गजलकार अनिल मीत उपस्थित रहे। विशेष उपस्थिति में कवि, पत्रकार एवं प्रकाशक डॉ. चेतन आनंद ने अपने विचार रखते हुए साहित्य को समाज की आत्मा बताया।


विशिष्ट अतिथियों के रूप में सुप्रसिद्ध दोहाकार डॉ. मनोज कामदेव, वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिकित्सक डॉ. अशोक कुमार ‘मयंक’ तथा साहित्यकार एवं कशिश काव्य मंच की संस्थापक अध्यक्ष कंचन वाष्र्णेय की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली मंच संचालन प्रसिद्ध कवयित्री राज रानी भल्ला ने किया। काव्य गोष्ठी के दौरान 35 कवियों ने गीत, गजल, दोहे और मुक्तकों के माध्यम से प्रेम, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक विसंगतियों तथा जीवन मूल्यों पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी। श्रोतागण देर तक साहित्यिक रसधारा में डूबे रहे और सभागार तालियों की गूंज से बार-बार मुखरित होता रहा। सभी रचनाकारों एवं अतिथियों को कुसुम लता पुंडोरा कुसुम की ओर से स्मृति चिह्न, अंगवस्त्र और मोतियों की माला पहनाकर सम्मनित किया गया। यह आयोजन साहित्य प्रेमियों के लिए एक यादगार अवसर बन गया, जिसने साहित्य के प्रति नई ऊर्जा, अपनापन और रचनात्मक विश्वास को और अधिक मजबूत किया।

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