सीहोर : भागवत कथा में आज किया जाएगा भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 19 मई 2026

सीहोर : भागवत कथा में आज किया जाएगा भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह

  • कथा के दूसरे दिन राजा परीक्षित जन्म और सुखदेव आगमन के प्रसंग का हुआ वर्णन

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सीहोर। शहर के खजांची लाइन स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में अधिकमास के अवसर पर सर्व ब्राह्मण समाज महिला मंडल के तत्वाधान में जारी सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार कथा वाचक पंडित रविशंकर तिवारी ने परीक्षित जन्म, शुकदेव आगमन की कथा सुनाई। जिसे सुनकर श्रोता भाव विभोर हो उठे। उन्होंने कथा के दूसरे दिन महाभारत प्रसंग, राजा परीक्षित का जन्म एवं शुकदेव महाराज के आगमन आदि के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने से क्रोधित होकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। ब्रह्मास्त्र लगने से अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ।


परीक्षित जब बड़े हुए नाती पोतों से भरा पूरा परिवार था। सुख वैभव से समृद्ध राज्य था। एक दिन वह क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम गए। उन्होंने आवाज लगाई, लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने कोई उत्तर नहीं दिया। राजा परीक्षित स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सर्प को क्रमिक मुनि के गले में डाल कर चले गए। अपने पिता के गले में मृत सर्प को देख मुनि के पुत्र ने श्राप दे दिया कि जिस किसी ने भी मेरे पिता के गले में मृत सर्प डाला है। उसकी मृत्यु सात दिनों के अंदर सांप के डसने से हो जाएगी। ऐसा ज्ञात होने पर राजा परीक्षित ने विद्वानों को अपने दरबार में बुलाया और उनसे राय मांगी। उस समय विद्वानों ने उन्हें सुखदेव का नाम सुझाया और इस प्रकार शुकदेव का आगमन हुआ। ठीक सातवें दिन सर्प के काटने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। उसी श्राप के निवारण के लिए वेद व्यास द्वारा रचित भागवत कथा शुकदेव द्वारा सुनाई गई। जिसमें उनका उत्थान हो गया। राजा परीक्षित ने सात दिन भागवत सुनकर किस तरह अपना उद्धार कर लिया। उसी तरह प्रत्येक व्यक्ति को भागवत का महत्व समझना चाहिए। भागवत अमृत रूपी कलश है। जिसका रसपान करके आदमी अपने जीवन को कृतार्थ कर लेता है। इसलिए जहां भी भागवत होती है।


आज किया जाएगा भगवान शिव का विवाह

सर्व ब्राह्मण समाज महिला मंडल की अध्यक्ष नीलम शर्मा ने बताया कि बुधवार को कथा के तीसरे दिन भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का विस्तार से वर्णन किया जाएगा। कथा प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक आयोजित की जा रही है। उन्होंने सभी क्षेत्रवासियों से कथा का श्रवण करने की अपील की। 

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