वाराणसी : निजीकरण के खिलाफ भिखारीपुर में गरजे बिजलीकर्मी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 26 मई 2026

वाराणसी : निजीकरण के खिलाफ भिखारीपुर में गरजे बिजलीकर्मी

  • ऊर्जा प्रबंधन पर दमनात्मक कार्रवाई का आरोप, एफआईआर और निलंबन वापस लेने की मांग
  • क्भिखारीपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय पर प्रदर्शन, बोले– कर्मचारी हितों की अनदेखी हुई तो आंदोलन होगा तेज

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वाराणसी (सुरेश गांधी)। बिजली के निजीकरण, कर्मचारी विरोधी नीतियों और ऊर्जा प्रबंधन की कथित दमनात्मक कार्यवाहियों के विरोध में सोमवार को भिखारीपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय पर बिजलीकर्मियों का आक्रोश फूट पड़ा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले पूर्वांचल के बिजलीकर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। प्रदर्शन में अभियंता, जूनियर इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी तथा संविदाकर्मी बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि ऊर्जा प्रबंधन कर्मचारी हितों की बात करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार निशाना बना रहा है। कर्मचारियों के खिलाफ स्थानांतरण, निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई और मानसिक दबाव बनाकर उन्हें डराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति कर्मचारी हितों और लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ है। बिजलीकर्मियों ने प्रदेश सरकार और ऊर्जा प्रबंधन पर विद्युत वितरण व्यवस्था के निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह फैसला सिर्फ कर्मचारियों के लिए ही नहीं बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। वक्ताओं का कहना था कि निजीकरण से बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ सेवा गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।


प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री और शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते का अब तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष है। साथ ही मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजलीकर्मियों पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानांतरण और अन्य कार्रवाई को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि कर्मचारी संगठनों की लोकतांत्रिक गतिविधियों को भी दबाने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन पदाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट, वेतन रोकने, बड़े पैमाने पर स्थानांतरण और मानसिक उत्पीड़न जैसी कार्रवाइयों से कर्मचारियों में रोष है। प्रदर्शन के दौरान मई 2025 में किए गए सेवा नियमों के संशोधन का भी विरोध किया गया। वक्ताओं ने इसे कर्मचारी विरोधी बताते हुए कहा कि बिना जांच और बिना सुनवाई के सेवा समाप्त करने का प्रावधान अलोकतांत्रिक है। इसके अलावा फेशियल अटेंडेंस के आधार पर वेतन कटौती, विरोध कार्यक्रमों में भाग लेने पर स्थानांतरण, कर्मचारियों के आवासों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने पर अभियंताओं से वसूली के आदेश को वापस लेने की मांग उठाई गई। सभा को ई. जितेंद्र सिंह गुर्जर, ई. मायाशंकर तिवारी, महेंद्र राय, ओपी सिंह, प्रेमनाथ राय, चंद्रभूषण उपाध्याय, सूर्यदेव पाण्डेय समेत कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया।

 


प्रमुख मांगें

3 दिसंबर 2022 के लिखित समझौते को लागू किया जाए

मार्च 2023 आंदोलन से जुड़े एफआईआर और निलंबन वापस हों

कर्मचारी उत्पीड़न और दमनात्मक कार्रवाई बंद की जाए

सेवा नियम संशोधन वापस लिया जाए

ट्रांसफार्मर क्षति पर अभियंताओं से वसूली के आदेश समाप्त हों

जबरन स्मार्ट मीटर लगाने और फेशियल अटेंडेंस आधारित वेतन कटौती पर रोक लगे

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