- ऊर्जा प्रबंधन पर दमनात्मक कार्रवाई का आरोप, एफआईआर और निलंबन वापस लेने की मांग
- क्भिखारीपुर स्थित प्रबंध निदेशक कार्यालय पर प्रदर्शन, बोले– कर्मचारी हितों की अनदेखी हुई तो आंदोलन होगा तेज
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री और शासन स्तर पर हुए लिखित समझौते का अब तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में व्यापक असंतोष है। साथ ही मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजलीकर्मियों पर दर्ज एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानांतरण और अन्य कार्रवाई को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि कर्मचारी संगठनों की लोकतांत्रिक गतिविधियों को भी दबाने का प्रयास किया जा रहा है। संगठन पदाधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट, वेतन रोकने, बड़े पैमाने पर स्थानांतरण और मानसिक उत्पीड़न जैसी कार्रवाइयों से कर्मचारियों में रोष है। प्रदर्शन के दौरान मई 2025 में किए गए सेवा नियमों के संशोधन का भी विरोध किया गया। वक्ताओं ने इसे कर्मचारी विरोधी बताते हुए कहा कि बिना जांच और बिना सुनवाई के सेवा समाप्त करने का प्रावधान अलोकतांत्रिक है। इसके अलावा फेशियल अटेंडेंस के आधार पर वेतन कटौती, विरोध कार्यक्रमों में भाग लेने पर स्थानांतरण, कर्मचारियों के आवासों में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने और ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त होने पर अभियंताओं से वसूली के आदेश को वापस लेने की मांग उठाई गई। सभा को ई. जितेंद्र सिंह गुर्जर, ई. मायाशंकर तिवारी, महेंद्र राय, ओपी सिंह, प्रेमनाथ राय, चंद्रभूषण उपाध्याय, सूर्यदेव पाण्डेय समेत कई पदाधिकारियों ने संबोधित किया।
प्रमुख मांगें
3 दिसंबर 2022 के लिखित समझौते को लागू किया जाए
मार्च 2023 आंदोलन से जुड़े एफआईआर और निलंबन वापस हों
कर्मचारी उत्पीड़न और दमनात्मक कार्रवाई बंद की जाए
सेवा नियम संशोधन वापस लिया जाए
ट्रांसफार्मर क्षति पर अभियंताओं से वसूली के आदेश समाप्त हों
जबरन स्मार्ट मीटर लगाने और फेशियल अटेंडेंस आधारित वेतन कटौती पर रोक लगे

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