पटना : बिहटा प्रखंड अंतर्गत मखदूमपुर गांव में हरी खाद एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर प्रशिक्षण - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 7 मई 2026

पटना : बिहटा प्रखंड अंतर्गत मखदूमपुर गांव में हरी खाद एवं संतुलित उर्वरक उपयोग पर प्रशिक्षण

Farmer-training
पटना (संवाददाता)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा “उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर गहन अभियान” के अंतर्गत 04 मई, को पटना जिले के बिहटा प्रखंड अंतर्गत मखदूमपुर गांव में जागरूकता-सह-ढैंचा बीज वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 21 कृषकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना था, जिससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार, फसल उत्पादकता में वृद्धि, उत्पादन लागत में कमी तथा अंततः किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। इस अवसर पर समेकित पोषक तत्व प्रबंधन  के सिद्धांतों पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें रासायनिक उर्वरकों के साथ-साथ कार्बनिक स्रोतों जैसे गोबर की खाद, कम्पोस्ट, हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के संयुक्त उपयोग के माध्यम से दीर्घकालीन मृदा उर्वरता बनाए रखने पर बल दिया गया।


कार्यक्रम के दौरान डॉ. संतोष कुमार एवं डॉ. कुमारी शुभा ने किसानों के साथ संवाद करते हुए ढैंचा को हरी खाद फसल के रूप में अपनाने के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ढैंचा मृदा में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाता है, वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है, सूक्ष्मजीव गतिविधि को प्रोत्साहित करता है तथा मृदा संरचना एवं जल धारण क्षमता में सुधार करता है। साथ ही किसानों को यह भी अवगत कराया गया कि ढैंचा की हरी खाद को मृदा में मिलाने से विशेषकर धान-आधारित फसल प्रणालियों में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों के बीच ढैंचा बीजों का वितरण भी किया गया, ताकि वे अपने खेतों में हरी खाद पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हों। किसानों को नियमित मृदा परीक्षण एवं स्थान-विशिष्ट पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी गई, जिससे उर्वरकों के अत्यधिक या असंतुलित उपयोग से बचते हुए पोषक तत्वों का कुशल उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम का समन्वयन श्री श्रीकांत चौबे एवं श्री सूरज कुमार द्वारा किया गया, जिन्होंने कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु क्षेत्रीय स्तर पर किसानों की सहभागिता सुनिश्चित की तथा सभी गतिविधियों का सुचारू रूप से क्रियान्वयन कराया। यह सम्पूर्ण कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

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