पटना : पूर्णिया में संतुलित उर्वरक उपयोग पर दो दिवसीय जागरूकता अभियान का समापन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

गुरुवार, 7 मई 2026

पटना : पूर्णिया में संतुलित उर्वरक उपयोग पर दो दिवसीय जागरूकता अभियान का समापन

Farmer-training-purnia
पटना (संवाददाता)। पूर्णिया जिले में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से दिनांक 6 मई, 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया में चल रहे दो दिवसीय जागरूकता अभियान कार्यक्रम के दूसरे दिन का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें 30 से अधिक किसानों एवं अन्य हितधारकों ने सहभागिता की । कार्यक्रम के दौरान किसानों को व्यवहारिक जानकारी प्रदान करते हुए संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि उर्वरकों का असंतुलित एवं अत्यधिक उपयोग न केवल मृदा स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि उत्पादन लागत बढ़ाने के साथ पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। किसानों को सलाह दी गई कि वे मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करें तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाकर रासायनिक, जैविक एवं हरित खादों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करें।


कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि गोबर की खाद, कम्पोस्ट एवं हरी खाद जैसे जैविक स्रोतों के उपयोग से मिट्टी की संरचना, जलधारण क्षमता तथा सूक्ष्मजीव गतिविधियों में सुधार होता है, जिससे फसलों की उत्पादकता दीर्घकालिक रूप से बढ़ती है। किसानों को हरित खाद के रूप में ढैंचा एवं सनई जैसी फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान, विभिन्न गाँवों से आए किसानों को ढैंचा का बीज प्रदर्शन हेतु वितरित किया गया, ताकि वे इसके लाभों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें। साथ ही, गोबर की खाद  के वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उपयोग की तकनीकों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों एवं वैज्ञानिकों की सक्रिय भागीदारी रही, जिनमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से आये डॉ. संतोष कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, एवं डॉ. गौस अली, वैज्ञानिक तथा कृषि विज्ञान केंद्र, पूर्णिया के वैज्ञानिकों एवं तकनीकी कर्मचारियों ने किसानों के साथ सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को सुना और समाधान प्रस्तुत किए।

कोई टिप्पणी नहीं: