माँ गंगा के पौराणिक और धार्मिक ग्रंथों में 108 मुख्य नाम बताए गए हैं, जिनमें भागीरथी,जाह्नवी,त्रिपथगा, विष्णुपदी और सुरसरि नाम सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं। सनातन धर्म में वेद शास्त्रों में वर्णन है कि व्यक्ति को जीवन में एक बार माँ गंगा का दर्शन, पूजन, स्नान अवश्य करना चाहिये यह परम्परा कई वर्षो से हमारे ऋषि मुनियों पूर्वजों द्वारा निभाई जा रही है। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार दशहरा का अर्थ है दस दोषों को हरने वाला इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के तीन प्रकार के दैहिक, तीन प्रकार के मानसिक और चार प्रकार के वाचिक कुल दस पापों का शमन होता है। शास्त्रों में वर्णन है कि गंगा द्वारे कुशावर्ते बिल्वके नीलपर्वते स्नात्वा कनखले देवि पुनर्जन्म न विद्यते l अर्थात माँ गंगा में श्रद्धापूर्वक स्नान करने से जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है। इसलिये मां गंगा को मोक्षदायिनी माना गया है क्योकि माँ गंगा मनुष्य के पाप को हर लेती है और उसे निर्मल पवित्र कर देती है। इसलिये हिन्दू धर्म में सभी पूजा पाठ में देश की सभी पवित्र नदियों का स्मरण कर पूजा अर्चना की जाती है जिससे माँ प्रसन्न होकर मनुष्य की सभी मनोवांछित कामनाएं पूर्ण करती है । पंडित सुनील शर्मा के अनुसार गंगा दशहरा पर्व पर दस की संख्या का विशेष महत्व है। गंगा दशहरा पर अपने सामर्थ्य अनुसार 10 ब्राहम्ण व जरुरतमंदो को भोजन कराना,10 किलो अन्नदान, वस्त्रदान 10 फल व अन्य साम्रगी का दान करना चाहिये। शाम के समय किसी नदी घाट या घर के मंदिर में 10 दीपक जलाएं और माँ गंगा की आरती करें।
सीहोर। गंगा दशहरा पर्व सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य अर्जन का पर्व है l इस वर्ष गंगा दशहरा पर्व ज्येष्ठ पुरुषोत्तम मास मे मनाया जायेंगा l दशमी तिथि आज 25 मई सोमवार सुबह 8 बजकर 8 मिनिट से प्रारम्भ होगी और 26 मई मंगलवार सुबह 7 बजकर 46 मिनिट तक रहेगी । पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस दिन माँ गंगा का अवतरण पृथ्वीलोक पर हुआ था। गंगा दशहरा पर्व के अवसर प्रातः काल में स्नान ध्यान करना लाभप्रद हैं। रुद्राअभिषेक और गौसेवा का गंगा दशहरा पर विशेष महत्व है क्योंकि तपस्वी राजा भागीरथ की प्रार्थना पर देवादिदेव शंकर की जटा से ही पृथ्वी लोक पर मां गंगा का अवतरण हुआ है l

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