प्रयागराज : 46 साल बाद कचहरी कांड में फैसला, पूर्व विधायक विजय मिश्रा हत्या के मामले में दोषी करार - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 12 मई 2026

प्रयागराज : 46 साल बाद कचहरी कांड में फैसला, पूर्व विधायक विजय मिश्रा हत्या के मामले में दोषी करार

  • प्रयागराज एमपी-एमएलए कोर्ट का बड़ा फैसला, सजा पर आज होगा ऐलान; कोर्ट परिसर में सुरक्षा कड़ी

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प्रयागराज (सुरेश गांधी)। लगभग 46 वर्षों तक न्यायालय की चौखट पर लंबित रहे बहुचर्चित प्रयागराज कचहरी हत्याकांड में मंगलवार को बड़ा फैसला आया। प्रयागराज की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने भदोही की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से चार बार विधायक रहे विजय मिश्रा समेत चार आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया। विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट योगेश कुमार तृतीय ने फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या के आरोप सिद्ध माने। अदालत अब बुधवार को सजा का ऐलान करेगी। फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर न्यायिक हलकों तक हलचल तेज हो गई है। हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोष सिद्ध होने के बाद विजय मिश्रा को उम्रकैद से लेकर कठोर दंड तक मिलने की संभावना जताई जा रही है। अदालत परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी सख्त कर दी गई। मामला वर्ष 1980 का है, जब प्रयागराज कचहरी परिसर के भीतर दिनदहाड़े गोलीबारी कर हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया था। उस समय इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। लंबे समय तक मुकदमे की सुनवाई चलती रही और अब करीब साढ़े चार दशक बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।


क्या था प्रयागराज कचहरी हत्याकांड?

मामले के अनुसार, कर्नलगंज थाने में हाथी गांव नवाबगंज निवासी श्याम नारायण पांडे ने 11 फरवरी 1980 को एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि वह एक मुकदमे में जमानत कराने के लिए कचहरी आए थे और अपने अधिवक्ता की सीट पर बैठे थे। उसी दौरान विजय मिश्रा, बलराम, संतराम और जीत नारायण बंदूक और राइफल लेकर पहुंचे तथा प्रकाश नारायण पांडे पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गोली लगने से प्रकाश नारायण पांडे की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मौके से हथियार भी बरामद किए थे। अदालत में श्याम नारायण पांडे का बयान शपथपूर्वक दर्ज किया गया, जिसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया।


वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई पेशी

पूर्व विधायक विजय मिश्रा फिलहाल आगरा जेल में बंद हैं। उन्हें इस मामले की पूरी सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। विजय मिश्रा पहले से ही कई अन्य मामलों में सजा काट रहे हैं। उन पर दुष्कर्म, रंगदारी, गैंगस्टर, हत्या, अपहरण और शस्त्र अधिनियम समेत अनेक गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।


‘सफेदपोश माफिया’ के रूप में चिन्हित

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विजय मिश्रा को ‘सफेदपोश माफिया’ की श्रेणी में चिह्नित किया जा चुका है। प्रशासनिक कार्रवाई के तहत उनकी एक अरब रुपये से अधिक की चल और अचल संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार, विजय मिश्रा के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट, गुंडा एक्ट, खनन अधिनियम और रंगदारी समेत 77 से अधिक मुकदमे विभिन्न जिलों में दर्ज रहे हैं। इनमें प्रयागराज, वाराणसी, भदोही, मीरजापुर और मेरठ तक के मामले शामिल हैं। हालांकि, कुछ मामलों में वह बरी भी हो चुके हैं, जबकि कई मुकदमों की सुनवाई अभी जारी है।


लंबित मामलों में बड़ा संदेश

प्रयागराज कचहरी हत्याकांड में आया यह फैसला प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों के निस्तारण की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। करीब आधी सदी पुराने इस मुकदमे में अदालत द्वारा दोष सिद्ध किए जाने को न्यायिक दृढ़ता और कानून के प्रति जवाबदेही के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी निगाहें बुधवार को होने वाले सजा के ऐलान पर टिकी हैं, जहां अदालत विजय मिश्रा और अन्य दोषियों के भविष्य पर अंतिम मुहर लगाएगी।

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