वाराणसी : सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए : मोदी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 11 मई 2026

वाराणसी : सनातन को मिटाने वाले खुद मिट गए : मोदी

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वाराणसी (सुरेश गांधी)। प्रभास पाटन की धरती सोमवार को सिर्फ एक धार्मिक आयोजन की साक्षी नहीं बनी, बल्कि उसने भारत की हजार वर्षों की संघर्षगाथा, स्वाभिमान और सनातन चेतना का विराट उत्सव देखा। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान शिव की महापूजा, जलाभिषेक और मंदिर शिखर पर स्थापित विशाल कलश का 11 तीर्थों के जल से अभिषेक कर इतिहास और आस्था के संगम को नया आयाम दिया। पूरे प्रभास क्षेत्र में “हर-हर महादेव” और “जय सोमनाथ” के उद्घोष गूंजते रहे। मंदिर परिसर पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा हुई, वैदिक मंत्रों की ध्वनि और समुद्र की लहरों के बीच ऐसा वातावरण बना मानो स्वयं इतिहास वर्तमान में उतर आया हो।


प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह में स्मारक डाक टिकट और विशेष सिक्का जारी करते हुए कहा, सोमनाथ केवल पत्थरों का मंदिर नहीं, यह भारत की आत्मा, आस्था और अमर चेतना का प्रतीक है। जो काल से परे हैं, वही महादेव आज भी इस राष्ट्र की ऊर्जा बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि महमूद गजनवी, खिलजी और तुगलक जैसे आक्रांताओं ने सोमनाथ को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि यह केवल भौतिक ढांचा नहीं, करोड़ों भारतीयों की आत्मा का केंद्र है। पहले विध्वंस के हजार साल बाद भी सोमनाथ अडिग खड़ा है। यह भारत की अमरता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद के राजनीतिक दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के स्वाभिमान से जुड़े प्रतीकों की लंबे समय तक उपेक्षा हुई। उन्होंने बिना नाम लिए तत्कालीन सत्ता व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि सोमनाथ पुनर्निर्माण को भी वैसी ही उपेक्षा झेलनी पड़ी, लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक बनाकर पुनर्जीवित किया। मोदी ने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद राम मंदिर निर्माण का भी विरोध हुआ, लेकिन भारत की सांस्कृतिक चेतना को कभी दबाया नहीं जा सकता। मोदी ने कहा, सोमनाथ गजनवी, खिलजी और तुगलक से लड़ा, लेकिन कभी झुका नहीं. 11 मई 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण को याद करते हुए ‘शक्ति और भक्ति’ के संगम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने दुनिया के दबाव के बावजूद परमाणु परीक्षण किया और उसका नाम “ऑपरेशन शक्ति” रखा गया। भारत में शक्ति का आधार भी शिव हैं और भक्ति का केंद्र भी शिव हैं.


समारोह का सबसे भव्य क्षण तब आया जब 760 किलो वजनी और 1100 लीटर जल क्षमता वाले कलश का 90 मीटर ऊंची क्रेन के जरिए अभिषेक किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने रिमोट संचालन से देश के 11 प्रमुख तीर्थों के जल से यह कुंभाभिषेक कराया। सोमनाथ मंदिर परिसर में सुबह से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा। भगवा ध्वज, डमरू, शंखनाद और शिवभक्ति के बीच सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सोमनाथ के संघर्ष और पुनर्जागरण की कथा जीवंत कर दी। भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने भी आसमान में तिरंगा बनाकर समारोह को रोमांच से भर दिया। छह हॉक एमके-132 विमानों के एयर शो ने श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया। प्रधानमंत्री ने वैश्विक संकटों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए देशवासियों से संयम और राष्ट्रहित में योगदान की अपील भी की। उन्होंने पेट्रोल-डीजल की खपत घटाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और एक वर्ष तक सोने के आभूषणों की खरीद से बचने का आग्रह किया ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके। सोमनाथ मंदिर, जिसे 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है, सदियों से भारत की सांस्कृतिक शक्ति और समृद्धि का प्रतीक रहा है। बार-बार टूटने और फिर खड़े होने की इसकी गाथा ही उसे केवल मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सनातन जिजीविषा का सबसे बड़ा प्रतीक बनाती है।

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